Medha Rupam is humiliated on social media: नोएडा DM मेधा रूपम पर युवराज मेहता मौत मामले में लापरवाही फूटा ठीकरा, SIT जांच जारी

Medha Rupam is humiliated on social media: नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। कई यूजर्स और विपक्षी नेताओं ने गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी (DM) मेधा रूपम को सीधे जिम्मेदार ठहराया है। आरोप है कि घटना के समय रेस्क्यू ऑपरेशन में भयानक लापरवाही बरती गई, SDRF और पुलिस के जवान मौके पर तमाशा देखते रहे, जबकि युवराज कार में फंसे होने के बावजूद करीब दो घंटे तक मदद के लिए चिल्लाता रहा।

सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि DM मेधा रूपम, जो जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की चेयरपर्सन भी हैं, घटना के चार दिन बाद मौके पर पहुंची और पत्रकारों के सवालों से बचती नजर आईं। कई पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि उनके पिता मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार होने के कारण उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। विपक्षी दल के नेता और यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या “वीआईपी रसूख” अब जान से बड़ा हो गया है? छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, लेकिन DM क्यों बची हुई हैं?
ये पोस्ट्स तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें युवराज की मौत को “हादसा नहीं, हत्या” बताया जा रहा है और प्रशासन की सुस्ती पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

नोएडा इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले में डेवलपर गिरफ्तार
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 16-17 जनवरी 2026 की रात घने कोहरे के बीच हुई दर्दनाक घटना में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में जांच तेज हो गई है। युवराज की SUV कार निर्माणाधीन साइट पर पानी से भरे लगभग 70 फीट गहरे गड्ढे में गिर गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार मौत की वजह डूबने से एस्फिक्सिएशन और हार्ट फेलियर थी। युवराज ने सनरूफ से बाहर निकलकर मदद मांगी और पिता से फोन पर बात भी की, लेकिन रेस्क्यू में देरी के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। एक स्थानीय व्यक्ति ने रस्सी बांधकर बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है, जिसे पांच दिनों में रिपोर्ट सौंपनी है। SIT ने मौके का निरीक्षण किया, जिसमें DM मेधा रूपम भी शामिल हुईं। निर्माण कंपनी Wiztown Planners के डायरेक्टर को लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। हादसे के चार दिन बाद (लगभग 90 घंटे बाद) क्रेन की मदद से कार को गड्ढे से बाहर निकाला गया।

रेस्क्यू में देरी पर उठे सवालों के बीच रिपोर्ट्स में कहा गया कि बचाव दल के पास पर्याप्त लंबी रस्सी नहीं थी। विपक्षी दलों (AAP और कांग्रेस) ने DM मेधा रूपम पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और उनके पिता CEC ज्ञानेश कुमार होने का हवाला देकर नेपोटिज्म का मुद्दा उठाया है। हालांकि, अब तक DM या DDMA पर कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि छोटे अधिकारियों और डेवलपर पर एक्शन लिया गया है।

मामला राजनीतिक रूप से गरमा गया है, लेकिन जांच SIT के हाथ में है और जल्द रिपोर्ट आने की उम्मीद है। युवराज के परिवार ने न्याय की मांग की है और उनके पिता ने सीएम योगी से मिलने की इच्छा जाहिर की है।

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