Medanta Super Speciality Hospital, Noida: लंग कैंसर के इलाज में एक नया कीर्तिमान, चेस्ट ऑनको-सर्जरी एंड लंग ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर डॉ. बेलाल बिन आसफ ने पूरी जानकारी

Medanta Super Speciality Hospital, Noida: मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा ने लंग कैंसर के इलाज में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल में नोएडा की पहली रोबोटिक लंग कैंसर सर्जरी सफलतापूर्वक की गई, साथ ही एडवांस्ड रोबोटिक थोरेसिक सर्जरी एंड लंग कैंसर क्लिनिक का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर लंग कैंसर जागरूकता सेशन का आयोजन भी हुआ, जिसमें मरीजों को बिना लक्षणों के भी कैंसर होने की संभावना और नियमित जांच के महत्व पर जोर दिया गया।

इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट सर्जरी, चेस्ट ऑनको-सर्जरी एंड लंग ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर डॉ. बेलाल बिन आसफ ने बताया कि 65 वर्षीय मरीज रूटीन कार्डियोलॉजी जांच के लिए आए थे। सीटी एंजियोग्राफी में संयोगवश फेफड़े में नोड्यूल मिला, जो आगे की जांच में स्टेज-1 लंग कैंसर निकला। मरीज को कोई लक्षण नहीं थे और न ही स्मोकिंग का इतिहास था। रोबोटिक राइट लोअर लोबेक्टॉमी विद सिस्टेमैटिक मेडियास्टाइनल लिम्फ नोड डिसेक्शन की गई, जो हाई प्रिसिशन वाली जटिल सर्जरी है।

डॉ. आसफ ने कहा, “यह सर्जरी पूरी तरह सफल रही। मरीज बिना किसी जटिलता के रिकवर होकर डिस्चार्ज हो गए। रोबोटिक तकनीक से बेहतर विज़ुअलाइजेशन, सटीक डिसेक्शन और उच्च सर्जिकल एक्युरेसी मिली।” यह सर्जरी मेदांता गुरुग्राम से डॉ. सुखराम बिश्नोई और डॉ. प्रवीन पांडा के सहयोग से प्रो. डॉ. अरविंद कुमार के नेतृत्व में हुई।

रोबोटिक सर्जरी के फायदे
रोबोटिक सर्जरी की तुलना में पारंपरिक ओपन सर्जरी में 20-25 सेंटीमीटर का बड़ा कट लगता है, रिब्स स्प्रेड की जाती हैं और मांसपेशियां कटती हैं। रोबोटिक विधि में सिर्फ चार 8 मिलीमीटर और एक 2 सेंटीमीटर के छोटे कट्स लगते हैं। इससे दर्द कम होता है, ब्लड लॉस कम होता है, आईसीयू और हॉस्पिटल स्टे कम लगता है, और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाता है।

लंग कैंसर की जागरूकता
डॉक्टरों ने जोर दिया कि लंग कैंसर बिना लक्षणों के भी हो सकता है, इसलिए नियमित स्क्रीनिंग जरूरी है। सामान्य लक्षणों में लगातार खांसी (दो-तीन हफ्ते से ज्यादा), खांसी में खून, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं। इनको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। भारत में लंग कैंसर देर से पता चलने के कारण मौत का प्रमुख कारण है, लेकिन अर्ली डिटेक्शन से इलाज संभव है।

नए क्लिनिक के साथ नोएडा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के मरीजों को विश्व स्तरीय रोबोटिक थोरेसिक ऑन्कोलॉजी सेवाएं घर के पास मिलेंगी। इससे दूर के शहरों में जाने की जरूरत कम होगी और बेहतर परिणाम मिलेंगे। मेदांता की यह पहल क्षेत्रीय मरीजों की जीवन गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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