Supreme Court reprimands Maneka Gandhi: ‘कसाब ने कोर्ट की अवमानना नहीं की, आपकी क्लाइंट ने की’; स्ट्रे डॉग्स केस में पॉडकास्ट कमेंट्स पर नाराजगी

Supreme Court reprimands Maneka Gandhi: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी को आवारा कुत्तों (स्ट्रे डॉग्स) मामले में कोर्ट के आदेशों की आलोचना करने पर तीखी फटकार लगाई। बेंच ने उनकी पॉडकास्ट टिप्पणियों और बॉडी लैंग्वेज को कोर्ट की अवमानना करार दिया, लेकिन “उदारता” दिखाते हुए कंटेम्प्ट कार्यवाही शुरू नहीं की। जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने मेनका के वकील को भी नहीं बख्शा और कहा कि अजमल कसाब ने अवमानना नहीं की, लेकिन उनकी क्लाइंट ने की।

सुनवाई में क्या हुआ?
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने मेनका गांधी के वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन से पूछा:
“आपने कहा कि कोर्ट को टिप्पणियां करने में सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन क्या आपने अपनी क्लाइंट से पूछा कि उन्होंने क्या-क्या टिप्पणियां की हैं? क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उन्होंने सभी के खिलाफ तरह-तरह की बातें कही हैं। क्या आपने उनकी बॉडी लैंग्वेज देखी है?”

वकील रामचंद्रन ने बजट अलोकेशन को पॉलिसी मैटर बताया और कहा कि उन्होंने 26/11 हमलावर अजमल कसाब का केस भी लड़ा था। इस पर बेंच ने तीखा जवाब दिया:
“अजमल कसाब ने कोर्ट की अवमानना नहीं की, लेकिन आपकी क्लाइंट ने की है।”
बेंच ने आगे कहा कि कोर्ट अपनी “उदारता (magnanimity)” की वजह से कंटेम्प्ट की कार्यवाही शुरू नहीं कर रहा। कोर्ट ने मेनका से यह भी पूछा कि मंत्री रहते हुए स्ट्रे डॉग्स समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कितना बजट अलोकेशन कराया। मेनका महिला-बाल विकास, सामाजिक न्याय और पशु कल्याण जैसे मंत्रालय संभाल चुकी हैं।

मेनका गांधी की विवादास्पद टिप्पणियां
2025 में विभिन्न पॉडकास्ट्स और इंटरव्यू में मेनका ने कोर्ट के स्ट्रे डॉग्स संबंधी आदेशों की आलोचना की थी:
• आदेश को “अव्यवहारिक (impractical)” और “बहुत अजीब जजमेंट (very strange judgment)” बताया था।
• कहा कि यह “गुस्से में आए किसी व्यक्ति” से आया है।
• पूछा: “5,000 कुत्तों को हटाओगे तो रखोगे कहां? 50 शेल्टर चाहिए, लेकिन हैं नहीं। दिल्ली में 8 लाख कुत्ते हैं, 5,000 हटाने से क्या फर्क पड़ेगा?”
• कोर्ट से कहा कि पब्लिक इंस्टीट्यूशन की “वास्तविक स्थिति” देखनी चाहिए थी।

मामले का बैकग्राउंड
• पिछले साल जस्टिस पारदीवाला की बेंच ने दिल्ली में सभी स्ट्रे डॉग्स को 8 हफ्तों में पकड़कर शेल्टर में रखने का आदेश दिया था, जिस पर व्यापक विरोध हुआ।
• मामला तीन जजों की बेंच को ट्रांसफर हुआ, जिसने आदेश मॉडिफाई किया—केवल स्कूल, अस्पताल, बस-रेलवे स्टेशन से कुत्तों को स्थायी रूप से हटाने का निर्देश दिया गया।
• मेनका गांधी इस मामले में पशु अधिकारों की पक्षकार हैं।

ताजा स्थिति और प्रतिक्रियाएं
20 जनवरी 2026 की सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेनका की टिप्पणियां अवमानना के दायरे में आती हैं, लेकिन कार्यवाही नहीं की जाएगी। कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसे कोर्ट की “सख्त चेतावनी” बताया गया। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं में मिली-जुली प्रतिक्रिया—कुछ ने मेनका का समर्थन किया, तो कुछ ने कोर्ट की गरिमा बनाए रखने की बात कही। मामला अभी कोर्ट में लंबित है, अगली सुनवाई पर नजर रहेगी।
यह घटना न्यायिक गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पशु अधिकारों पर बहस को फिर से उभार रही है।

यहां से शेयर करें