Digital Arrest Scams in Southeast Asia’s Golden Triangle: भारतीयों के करोड़ों डूबे, गोल्डन ट्राएंगल के स्कैम सेंटर्स कौन चला रहा?

Digital Arrest Scams in Southeast Asia’s Golden Triangle: साउथईस्ट एशिया के गोल्डन ट्राएंगल इलाके (म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और थाईलैंड की सीमाएं) में चल रहे विशाल स्कैम कंपाउंड्स ने भारतीयों को डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर फ्रॉड्स में अरबों रुपयों का चूना लगा रखा है। कथित स्कैम किंगपिन चेन झी की हालिया गिरफ्तारी और चीन प्रत्यर्पण के बाद इन नेटवर्क्स पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है, लेकिन सैटेलाइट इमेजेस और रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये कंपाउंड्स अभी भी फैल रहे हैं या जगह बदल रहे हैं।

चेन झी की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण
चीनी मूल के अरबपति बिजनेसमैन चेन झी (38) को 6 जनवरी 2026 को कंबोडिया में गिरफ्तार किया गया। कंबोडिया और चीन की संयुक्त जांच के बाद 7-8 जनवरी को उन्हें चीन प्रत्यर्पित कर दिया गया। चीनी मीडिया ने उन्हें हथकड़ी और हूड पहने दिखाया। अमेरिका ने अक्टूबर 2025 में चेन पर वायर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया था, जिसमें उनकी प्रिंस ग्रुप पर कंबोडिया में 10 से ज्यादा स्कैम कंपाउंड्स चलाने और ट्रैफिक्ड मजदूरों से पिग बुचरिंग स्कैम्स कराने का इल्जाम है।

कंबोडिया ने चेन की प्रिंस बैंक को लिक्विडेशन में डाल दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने अपने नागरिकों को टारगेट करने वाले इन स्कैम्स पर सख्ती की है, लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन की कोशिशों को यह झटका है। चेन की गिरफ्तारी के बाद कंबोडिया में सैकड़ों ट्रैफिक्ड वर्कर्स (इंडोनेशिया सहित) रिहा हुए हैं।

स्कैम कंपाउंड्स की वर्तमान स्थिति
सैटेलाइट इमेजेस से पता चलता है कि म्यांमार-थाईलैंड बॉर्डर पर KK पार्क, श्वे कोक्को, ताई चांग और जियाओके जैसे कंपाउंड्स 2021 के बाद दोगुने से ज्यादा फैल चुके हैं। ये किले जैसे हैं—बार्ब्ड वायर, गार्ड्स, CCTV और कुत्तों से घिरे। ज्यादातर चीनी सिंडिकेट्स चलाते हैं और ट्रैफिक्ड लोगों (भारत, अफ्रीका, इंडोनेशिया आदि से) को जबरन स्कैमिंग कराते हैं।
म्यांमार में क्रैकडाउन के बाद कई ऑपरेशंस कंबोडिया शिफ्ट हो गए। थाईलैंड और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाइयों में सैकड़ों गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन इंडस्ट्री अरबों डॉलर की है और आसानी से रिलोकेट हो जाती है।

भारत में नुकसान के आंकड़े
2025 में भारतीयों ने साइबर फ्रॉड में ₹19,812 करोड़ गंवाए, जिसमें डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स का हिस्सा 8% (लगभग ₹1,585 करोड़) था। पिछले 6 सालों में कुल नुकसान ₹52,976 करोड़ से ज्यादा। औसतन एक विक्टिम ₹1.5 लाख से ज्यादा गंवाता है। हालिया केस में दिल्ली के एक NRI डॉक्टर दंपति ने ₹14 करोड़ खोए।
स्कैम के मुख्य प्रकार
• SIM बॉक्स स्कैम: इंटरनेशनल कॉल्स को लोकल दिखाने के लिए भारतीय SIMs का इस्तेमाल। फेक पुलिस/बैंक कॉल्स से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पैसे ऐंठे जाते हैं।
• पिग बुचरिंग: सोशल मीडिया पर लंबे समय तक रिलेशनशिप बनाकर फिर ब्लैकमेल या फेक इन्वेस्टमेंट स्कीम्स में फंसाना।
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद यह इंडस्ट्री फल-फूल रही है। भारत में पुलिस और सुप्रीम कोर्ट SIM रेगुलेशन और AI डिटेक्शन पर जोर दे रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बिना क्षेत्रीय सहयोग के यह समस्या जल्द खत्म नहीं होगी।

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