Former CJI DY Chandrachud’s statement at the Jaipur Literature Festival: ‘ट्रायल में देरी हो तो जमानत नियम होना चाहिए’, उमर खालिद का उदाहरण दिया

Former CJI DY Chandrachud’s statement at the Jaipur Literature Festival: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 में पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने न्यायिक प्रक्रिया और जमानत के मुद्दे पर खुलकर बात की। ‘आइडियाज ऑफ जस्टिस’ सेशन में पत्रकार वीर सांघवी के सवाल पर उन्होंने 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की लंबी हिरासत का जिक्र किया। चंद्रचूड़ ने कहा कि दोष सिद्धि से पहले जमानत एक अधिकार है और अगर त्वरित ट्रायल संभव नहीं है, तो जमानत नियम होना चाहिए, न कि अपवाद।
चंद्रचूड़ का पूरा बयान
पूर्व CJI ने कहा:
“हमारा कानून निर्दोषता की धारणा पर आधारित है। दोष सिद्ध होने से पहले जमानत अधिकार होना चाहिए। ट्रायल से पहले की हिरासत सजा का रूप नहीं ले सकती। वे (उमर खालिद और अन्य) पांच साल से ज्यादा समय से जेल में हैं। मैं अपनी अदालत की आलोचना नहीं कर रहा, लेकिन अगर त्वरित ट्रायल संभव नहीं है, तो जमानत नियम होना चाहिए और जेल अपवाद। जमानत इनकार सिर्फ तीन स्थितियों मे है—समाज को खतरा, भागने की आशंका या सबूतों से छेड़छाड़ का जोखिम।”
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सख्ती की जरूरत बताई, लेकिन जोर दिया कि लंबी हिरासत बिना ट्रायल के चिंता का विषय है। चंद्रचूड़ ने अपने कार्यकाल में 21,000 जमानत अर्जियों के निपटारे का भी जिक्र किया और कुछ अन्य मामलों (जैसे पवन खेड़ा और तीस्ता सीतलवाड़) में त्वरित राहत का उदाहरण दिया।

उमर खालिद की जमानत की ताजा स्थिति
उमर खालिद 2020 दिल्ली दंगों के कथित ‘बड़े षड्यंत्र’ मामले में UAPA और IPC की धाराओं के तहत आरोपी हैं। वे सितंबर 2020 से जेल में हैं और ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ है।
• 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी।
• इसी मामले में पांच अन्य सह-आरोपियों को सशर्त जमानत मिली। कोर्ट ने खालिद और इमाम को ‘षड्यंत्र के केंद्रीय चालक’ माना।
• दिसंबर 2025 में खालिद को बहन की शादी के लिए अंतरिम जमानत मिली थी, लेकिन नियमित जमानत नहीं।

प्रशांत भूषण की तीखी प्रतिक्रिया
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने चंद्रचूड़ के बयान पर तंज कसा। 19 जनवरी 2026 को अपने X पोस्ट में उन्होंने लिखा:
“ये वही पूर्व CJI कह रहे हैं जिन्होंने उमर खालिद की जमानत याचिका जस्टिस बेला त्रिवेदी की बेंच को भेजी थी, जो पहले मोदी सरकार की लॉ सेक्रेटरी रह चुकी हैं।”
भूषण ने इसे पाखंड बताया कि कार्यकाल में कार्रवाई नहीं की, अब रिटायरमेंट के बाद बयान दे रहे हैं।

अन्य प्रतिक्रियाएं
• कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने चंद्रचूड़ के बयान को सिद्धांतों की याद दिलाने वाला बताया।
• आलोचकों ने सवाल उठाया कि CJI रहते क्यों नहीं लागू किया।
• मानवाधिकार संगठनों ने इसे UAPA के दुरुपयोग पर बहस का मौका माना।
यह मुद्दा न्यायिक देरी, UAPA के सख्त प्रावधानों और निर्दोषता की धारणा पर चल रही बहस को फिर से उभार रहा है। मामले की अगली सुनवाई पर नजर रहेगी।

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