रहमान ने इंटरव्यू में बताया कि उन्हें यह बातें “चाइनीज व्हिस्पर्स” (अफवाहों) के जरिए पता चलती हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बॉलीवुड में काम की कमी से वे दुखी हैं, लेकिन इसे अच्छा मानते हुए कहा, “गुड!” क्योंकि अब वे चुनिंदा प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रहे हैं।
‘छावा’ को बताया ‘बांटने वाली फिल्म’
उसी इंटरव्यू में रहमान ने हालिया रिलीज फिल्म ‘छावा’ पर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे “डिविजिव” (बांटने वाली) फिल्म बताया, लेकिन साथ ही कहा कि संभाजी महाराज की बहादुरी दिखाने वाली इस कहानी के लिए संगीत कंपोज करना उनके लिए सम्मान की बात थी। रहमान ने फिल्म में नकारात्मक सीन में ‘सुबहानअल्लाह’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को “क्रिंज” बताया।
रामायण प्रोजेक्ट पर बोले- ‘मैं मुस्लिम हूं, लेकिन कला की कोई सीमा नहीं’
रहमान नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी फिल्म ‘रामायण’ (रणबीर कपूर स्टारर) के लिए हंस जिमर के साथ संगीत दे रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा, “मैं मुस्लिम हूं और रामायण हिंदू एपिक है, लेकिन कला और ज्ञान को धार्मिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।” उन्होंने अपनी परवरिश का जिक्र करते हुए बताया कि बचपन में ब्राह्मण स्कूल में पढ़ाई की, जिससे उन्हें सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाया।
बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं
रहमान के साम्प्रदायिक पूर्वाग्रह वाले बयान पर राजनीतिक और इंडस्ट्री हलकों में बहस छिड़ गई है।
• AIMIM नेता वारिस पठान ने भाजपा पर निशाना साधते हुए इसे “नफरत की राजनीति” का नतीजा बताया।
• भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के एक नेता ने रहमान के बयान को गलत ठहराया और कहा कि अवॉर्ड्स और काम टैलेंट पर मिलते हैं, सरकार पर नहीं।
• मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है।
रहमान इन दिनों ‘गांधी टॉक्स’, ‘मूनवॉक’ और ‘रामायण’ जैसे प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। उनके फैंस इस बयान को लेकर विभाजित नजर आ रहे हैं, जबकि इंडस्ट्री में यह बहस छिड़ी हुई है कि बॉलीवुड में वाकई कोई पूर्वाग्रह है या नहीं।

