Demand for Advocate Protection Act: वकीलों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका, ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ लागू करने की मांग तेज

Demand for Advocate Protection Act: देश भर में वकीलों पर बढ़ते हमलों, झूठे मुकदमों और असुरक्षा की घटनाओं को देखते हुए इंटरनेशनल एडवोकेट ऑर्गनाइजेशन (IAO) की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ को जल्द लागू किया जाए।

याचिका की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ए पी सिंह ने कहा कि यह कानून वकीलों पर लगाए जाने वाले झूठे केसों, राजनीतिक साजिशों, दुर्भावना से प्रेरित मुकदमों और पुलिस की मनमानी से बचाव प्रदान करेगा। उत्तर प्रदेश से सुधीर कुमार शर्मा (IAO के राष्ट्रीय अध्यक्ष) और राजस्थान से कमल सिंह राठौर सहित कई वकीलों ने इस याचिका का समर्थन किया है। संगठन ने देश भर से ऐसे कई उदाहरण पेश किए हैं, जिनमें वकीलों की हत्या हुई, लेकिन अपराधियों को सजा नहीं मिली या जांच लंबित रही। विशेष रूप से महिला वकीलों की असुरक्षा पर चिंता जताई गई है।

याचिका में लॉयर्स वेलफेयर एसोसिएशन और बीएसके लॉयर्स फेडरेशन जैसे संगठनों का भी सहयोग बताया गया है। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा, “वकील जब सुरक्षित होंगे, तभी गरिमापूर्वक न्याय की लड़ाई लड़ सकेंगे। ‘एक्सेस टू जस्टिस फॉर ऑल’ का सिद्धांत तभी साकार होगा, जब वकील बिना डर के गरीबों, दलितों, शोषितों और पीड़ितों की आवाज उठा सकें।”

ताजा जानकारी : याचिका पर अभी सुनवाई बाकी
सोशल मीडिया और कानूनी मंचों पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह याचिका हाल ही में दाखिल की गई है और वकीलों के बीच व्यापक समर्थन मिल रहा है। इससे पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 2021 में मॉडल ड्राफ्ट प्रस्तुत किया था, जबकि राजस्थान ने 2023 में राज्य स्तर पर ऐसा कानून पारित किया। देशव्यापी स्तर पर यह मांग लंबे समय से चली आ रही है, खासकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों में वकीलों पर हमलों की घटनाओं के बाद।

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट या प्रमुख कानूनी पोर्टलों पर इस याचिका की सुनवाई की तारीख या अंतरिम आदेश की कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन वकील समुदाय इसे बड़ी उम्मीद से देख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह कानून लागू होता है, तो यह न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

याचिका के माध्यम से वकीलों का मानना है कि उनकी सुरक्षा से न केवल उनका सम्मान बढ़ेगा, बल्कि पूरे देश के नागरिकों को न्याय मिलने की प्रक्रिया और मजबूत होगी।

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