Delhi\Noida: वेनेजुएला और ईरान में चल रहे राजनीतिक व आर्थिक अस्थिरता के हालात तथा रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक बाजार में एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ा दी है। इन तीनों मोर्चों पर तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग रूट, बीमा लागत और अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली पर पड़ रहा है, जिसका प्रभाव भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। खासकर इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल, केमिकल्स और फार्मा सेक्टर में ऑर्डर साइकिल प्रभावित हो रही है।
ईरान और वेनेजुएला जैसे तेल उत्पादक देशों पर प्रतिबंध और आंतरिक संकट के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बार-बार बाधित हो रही है। इससे भारत को कच्चा माल महंगा पड़ रहा है, वहीं यूरोप और लैटिन अमेरिका के बाजारों में डिमांड कमजोर हुई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोप की अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में है, जिसका सीधा असर भारतीय निर्यातकों को मिलने वाले ऑर्डर और भुगतान समय पर पड़ रहा है।
अमेरिका की नीतियों, विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” सोच और सख्त ट्रेड पॉलिसी का असर भी वैश्विक व्यापार पर देखने को मिल रहा है। ट्रंप की टैरिफ आधारित नीति, इमिग्रेशन पर सख्ती और घरेलू उद्योगों को प्राथमिकता देने के रुख से वैश्विक व्यापार में संरक्षणवाद बढ़ा है। इससे भारतीय आईटी, स्टील, ऑटो कंपोनेंट और टेक्सटाइल जैसे सेक्टरों पर दबाव बना है, क्योंकि अमेरिका भारत का बड़ा निर्यात बाजार है।
इन वैश्विक हालातों का असर दिल्ली-एनसीआर की प्रॉपर्टी मार्केट पर भी पड़ सकता है। एक्सपोर्ट और आईटी सेक्टर में अनिश्चितता बढ़ने से कॉर्पोरेट विस्तार की रफ्तार धीमी हो सकती है, जिसका प्रभाव कमर्शियल रियल एस्टेट और ऑफिस स्पेस की मांग पर पड़ेगा। हालांकि, घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और मेट्रो कनेक्टिविटी के कारण रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में फिलहाल बड़ी गिरावट की आशंका नहीं जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहा और अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी और सख्त हुई, तो भारत के एक्सपोर्ट के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर की प्रॉपर्टी मार्केट पर भी दबाव बढ़ सकता है। वहीं, स्थिति सामान्य होने और वैश्विक बाजार में स्थिरता लौटने पर भारत को वैकल्पिक सप्लायर के रूप में फायदा मिलने की संभावना भी बनी हुई है।
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