BMC elections and Marathi language row: मराठी अस्मिता का मुद्दा जेन जेड को नहीं भा रहा, युवा चाहते हैं गड्ढा-मुक्त सड़कें और साफ हवा

BMC elections and Marathi language row: ब्रिहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव 15 जनवरी को होने वाले हैं और मतगणना अगले दिन होगी। चुनावी मौसम में एक बार फिर मराठी अस्मिता और मराठी भाषा का मुद्दा जोर-शोर से उठाया जा रहा है, लेकिन मुंबई की जेन जेड (18-29 वर्ष) पीढ़ी इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर रही है। देश की सबसे अमीर नगर निगम पर कब्जे की जंग में युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 20-30% है और उनके लिए गड्ढा-मुक्त सड़कें, कचरा प्रबंधन, साफ हवा और पैदल चलने लायक फुटपाथ ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

जेन जेड की प्राथमिकताएं

मुंबई के एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, “मुंबई में ट्रैफिक, कचरा और परिवहन की हालत इतनी खराब है, लेकिन कोई इस पर बात नहीं करता। जेन जेड को मराठी अस्मिता से कोई सरोकार नहीं है। उनके लिए बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह प्रतिबिंबित नहीं हो रहा।”

28 साल के निकुंज सभरवाल ने कहा, “मुझे साफ हवा में खेलना है। कोर्ट का किराया महंगा है, ऊपर से प्रदूषण। मेयर मराठी बोले या गुजराती या स्वाहिली, अगर सड़कें ठीक कर दे तो ठीक है।”

29 साल की तन्वी क्षीरसागर (मराठी भाषी) ने कहा, “भाषा का मुद्दा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। शहर की भाषा सीखना जरूरी है, लेकिन यह वोट तय नहीं करेगा।”

संडे मिड-डे की संपादक आस्था अत्राय बनन ने कहा, “जेन जेड आवारा कुत्तों की देखभाल, प्रदूषण, गड्ढे और फुटपाथ की बात कर रहे हैं। वे न्यूयॉर्क या लंदन जैसे पैदल चलने लायक शहर चाहते हैं। भाषा का मुद्दा यहां फिट नहीं बैठता।”

बदलती जनसांख्यिकी

मुंबई में मराठी बोलने वालों की संख्या 1951 के 44% से घटकर 2011 में 36% रह गई है। युवा मतदाता बढ़ रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के लिए उन्हें लुभाना चुनौती है। कई युवा मतदान ही नहीं करते।

बीजेपी ने पिछले साल 50 जेन जेड उम्मीदवारों को सर्विस इंप्रूवमेंट के लिए चुना था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिथक है कि जेन जेड इस चुनाव को तय करेगा।

चुनाव में महायुति, शिवसेना (उद्धव) और एमएनएस के बीच कांटे की टक्कर है, लेकिन युवाओं की अनदेखी करने की कीमत किसी को भी चुकानी पड़ सकती है।

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