गठबंधन का शुरुआती विवाद और शिंदे की तीखी प्रतिक्रिया
20 दिसंबर को हुए नगर परिषद चुनाव में शिंदे गुट की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जिसने 60 सीटों में से 27 सीटें जीतीं। बहुमत से महज 4 सीटें दूर रहने के बावजूद बीजेपी (14 सीटें), कांग्रेस (12 सीटें) और एनसीपी (4 सीटें) ने मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ (AVA) बनाई और एक निर्दलीय के समर्थन से 32 का बहुमत हासिल कर लिया। इस गठबंधन से शिंदे गुट को सत्ता से बाहर कर दिया गया।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस गठबंधन को ‘‘हमारी विचारधारा के खिलाफ’’ करार देते हुए कड़ी आलोचना की। आज तक के ‘मुंबई मंथन’ कार्यक्रम में शिंदे ने कहा, ‘‘जहां कांग्रेस और बीजेपी ने अंबरनाथ में हाथ मिलाया, वहां उनकी नैतिकता कहां थी? विपक्ष हमें गठबंधन पर प्रवचन देता है, पहले खुद अपने ‘अनहोली पैक्ट’ की व्याख्या करे।’’ शिंदे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मुद्दे पर चर्चा करने की भी बात कही।
शीर्ष नेतृत्व का हस्तक्षेप: फडणवीस नाराज, गठबंधन समाप्त
गठबंधन की खबरें सामने आते ही महाराष्ट्र की सियासत में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थानीय बीजेपी इकाइयों की इस ‘‘अनुशासनहीनता’’ पर गहरी नाराजगी जताई और ऐसे गठबंधनों को तत्काल समाप्त करने के निर्देश दे दिया गया। फडणवीस ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस या AIMIM (अकोट नगर परिषद में एक अन्य विवादित गठबंधन) जैसे दलों से समझौते ‘‘किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं’’ हैं। बीजेपी नेतृत्व ने इसे स्थानीय स्तर की ‘‘गलती’’ बताते हुए क्षति नियंत्रण शुरू कर दिया है।
कांग्रेस ने भी त्वरित कार्रवाई की। पार्टी ने अंबरनाथ में गठबंधन करने वाले अपने ब्लॉक अध्यक्ष और सभी 12 पार्षदों को ‘‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’’ के लिए निलंबित कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने इसे ‘‘स्थानीय नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा’’ करार दिया।
ताजा मोड़: कांग्रेस पार्षदों का बीजेपी में विलय
निलंबन के कुछ घंटों बाद ही बड़ा उलटफेर हुआ। सभी 12 निलंबित कांग्रेस पार्षदों ने औपचारिक रूप से बीजेपी जॉइन कर ली। इससे बीजेपी की स्थिति और मजबूत हो गई है, जबकि शिंदे गुट अभी भी सत्ता से बाहर बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, इस ‘‘ऑपरेशन लोटस’’ जैसे कदम से स्थानीय स्तर पर बीजेपी को फायदा पहुंचा है।
अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
• शिवसेना (UBT): संजय राउत सहित नेताओं ने इसे ‘‘सत्ता की लालच’’ बताकर बीजेपी पर निशाना साधा।
• एनसीपी और अन्य: गठबंधन में शामिल एनसीपी (अजित पवार गुट) ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन समग्र महायुति गठबंधन में खटास की आशंका जताई जा रही है।
• सोशल मीडिया और विपक्षी दलों में इसे ‘‘विचारधारा की मौत’’ करार दिया जा रहा है, हालांकि दोनों प्रमुख दलों ने इसे ‘‘स्थानीय स्तर की भूल’’ बताकर पल्ला झाड़ लिया।
यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की स्थानीय निकाय राजनीति में ‘‘कुछ भी हो सकता है’’ की मिसाल पेश करता है। आने वाले दिनों में अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता की तस्वीर और साफ हो सकती है।

