The Stray Dog Crisis: भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश और जारी विवाद

The Stray Dog Crisis: जब मीडिया हिंदू मुसलमान करती है झूठ बोलती फिर भी संस्थाएं क्यो चली आती है मीडिया के पास इस सवाल पर चुप्पी साध ली थी संक्षय बब्बर ने, सवाल भी तो इन्होंने ही उठाया था दोषारोपण किया था मीडिया पर लेकिन सवालों पर मौनी बाबा बने रहे गए। भारत में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी और इससे जुड़े हमले एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बने हुए हैं। अनुमान के अनुसार, देश में करीब 1.5 करोड़ आवारा कुत्ते हैं, जो हर साल हजारों कुत्ता काटने के मामलों और रेबीज से मौतों का कारण बनते हैं। इस बीच, पशु अधिकार कार्यकर्ता सरकारी फंडिंग में अनियमितताओं का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए हैं।

कार्यकर्ताओं के आरोप: “फंड का ब्लैक होल”
पशु अधिकार कार्यकर्ता संक्षय बब्बर के नेतृत्व में “असली मुद्दा” (Asli Mudda) अभियान चल रहा है। दिसंबर 2025 में Asli Mudda 2.0 लॉन्च हुआ, जिसमें ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रमों में फंड के दुरुपयोग और कागजी नसबंदी के आरोप लगाए गए। कार्यकर्ताओं का दावा है कि पिछले एक दशक में केंद्र और राज्यों ने नसबंदी-टीकाकरण पर हजारों करोड़ रुपये खर्च दिखाए, लेकिन जमीनी हक़ीक़त पर कुत्तों की आबादी नियंत्रित नहीं हुई।

कुछ अनुमानों में दिल्ली-NCR में शेल्टर बनाने और कुत्तों को रखने की लागत 15,000 करोड़ रुपये तक बताई गई है। कार्यकर्ता इसे “प्रणालीगत विफलता” और “भ्रष्टाचार” कहते हैं, RTI और हलफनामों के आधार पर सबूत पेश करने का दावा करते हैं। संक्षय बब्बर ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह कुत्तों से ज्यादा “सुशासन की विफलता” का मुद्दा है, और SC आदेशों को “क्रूरता का लाइसेंस” बताया।

सुप्रीम कोर्ट का रुख: सुरक्षा पहले
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में कई महत्वपूर्ण आदेश दिए। अगस्त में दिल्ली-NCR से कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखने का निर्देश दिया, जिसे बाद में संशोधित किया गया। नवंबर 2025 के आदेश में स्कूल, अस्पताल, स्टेडियम, रेलवे स्टेशन जैसे “संस्थागत क्षेत्रों” से कुत्तों को पूरी तरह हटाने और वापस न छोड़ने का नियम बनाया।

जनवरी 2026 में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने सभी सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों को एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबुलिन का स्टॉक रखने का आदेश दिया, क्योंकि कोर्ट ने कुत्ता काटने के मामलों में इलाज की कमी को चिह्नित किया। कोर्ट ने ABC नियमों 2023 को आधार मानते हुए नसबंदी-टीकाकरण को प्राथमिकता दी, लेकिन संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा को तरजीह दी। अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को है।

दोनों पक्षों की दलीलें
• सुरक्षा समर्थक: हर साल 20,000 से ज्यादा रेबीज मौतें होती हैं, ज्यादातर बच्चे और कमजोर वर्ग प्रभावित। शेल्टर और फेंसिंग जरूरी।
• पशु प्रेमी: कुत्तों को दोषी ठहराना गलत; समस्या फंड मिसयूज और खराब मैनेजमेंट की है। mass relocation से क्रूरता और ओवरक्राउडिंग बढ़ेगी।
यह मुद्दा करुणा, सुरक्षा और जवाबदेही का संतुलन मांगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावी ABC कार्यक्रम, पारदर्शी फंडिंग और जन जागरूकता से समाधान संभव है। फिलहाल बहस जारी है, और देश इस “नरसंहार vs चमत्कार” के बीच रास्ता तलाश रहा है।

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