Noida News। नोएडा में लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढती जा रही है। ये संख्या 2025 में 50 हजार पार कर गई। इनमें इलेक्ट्रिक कार, बाइक, स्कूटर, ई-ऑटो और बसें भी शामिल हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी बताया जा रहा है। इसके अलावा अब ईवी की गुणवत्ता में पहले से कई अधिक सुधार आना और चार्जिंग स्टेशनों का लगातार स्थापित होना है। इस कारण लोग अब ईवी और हाइब्रिड वाहनों को पसंद कर रहे हैं।
ईवी के प्रति बढ़ते रुझान की वजह
ईवी के प्रति बढ़ते रुझान की सबसे बड़ी वजह दिल्ली एनसीआर जैसे इलाके में प्रदूषण के दौरान कम रोक टोक और सरकार द्वारा दी जाने वाली अच्छी खासी सब्सिडी भी है। इसके अनुकूल, तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन हैं। अलावा कम परिचालन लागत, पर्यावरण के परिवहन विभाग के अनुसार यूपी सरकार की ईवी नीति के तहतं यदि कोई उपभोक्ता उत्तर प्रदेश में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उसे एक लाख रुपये प्रोत्साहन से मध्यम वर्ग और युवा वर्ग के लिए तक की सब्सिडी का लाभ मिलता है। इस ईवी खरीदना और भी आकर्षक हो गया है। हो गई है। ई-ऑटो की संख्या 10,753 हो गई जनपद में कुल ईवी की संख्या 51,118 है। ई-ऑटो चालक रमेश ने बताया कि उन्होंने इसी अक्तूबर 2025 में ऑटो खरीदा था। उनका कहना है कि इन वाहनों की अन्य वाहनों के मुकाबलें रोक-टोक कम है।
बुकिंग में हो रहा इजाफा
वाहन डीलर्स के अनुसार जनवरी में डिलीवरी के लिए अब तक छह हजार गाड़ियां बुक हो चुकी हैं। अभी इसमें और इजाफा हो सकता है। वाहन डीलर्स के अनुसार के बीच में आएगा। जनवरी 2026 के लिए बुकिंग नई गाड़ियों का स्टॉक 15 जनवरी से 20 जनवरी जारी है। एक कार कंपनी के सेल्स अधिकारी विजेंद्र ने कहा कि बीते साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी अधिक बुकिंग हुई है। परिवहन विभाग के अनुसार जनवरी 2024 में 11575 वाहनों का पंजीकरण हुआ था। इसमें 6401 दोपहिया वाहन और 5174 कार शामिल थी। वहीं, जनवरी 2025 में 6846 दोपहिया वाहन और 6154 कार का रजिस्ट्रेशन हुआ था।
इनमें सफर करना पसंद
ईवी वाहन नहीं फैलाते हैं प्रदूषण और ज्यादा आवाज भी नहीं करते हैं। इसलिए लोग भी इनमें सफर करना पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा इसी सितंबर माह में हुए यूपी इंटरनेशलन ट्रेड शो के दौरान परिवहन आयुक्त ने बसों को भी हरी झंडी दिखाई थी, जिनका संचालन नोएडा से हरिद्वार के बीच किया जा रहा है। इसके अलावा नोएडा में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है।
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