मेहता ने कहा, “पीड़िता घटना के समय 15 साल से थोड़ी ज्यादा उम्र की नाबालिग थी। सेंगर पर आईपीसी की पुरानी धारा 376(2)(i) और पोक्सो एक्ट की धाराएं 5 व 6 लगी थीं, दोनों के तहत दोषसिद्धि हुई। न्यूनतम सजा 20 साल की है, अधिकतम आजीवन कारावास।” उन्होंने जोर दिया कि सेंगर इलाके के विधायक थे, बहुत प्रभावशाली थे और ‘प्रभुत्व की स्थिति’ में थे, चाहे अपराध के समय सार्वजनिक सेवक हों या नहीं। पोक्सो के तहत घुसपैठिया यौन हमला भी सिद्ध हुआ।
सुनवाई में क्या हुआ?
चीफ जस्टिस सूर्या कांत की अगुवाई वाली अवकाशकालीन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित सुनवाई की। SG मेहता ने ट्रायल कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें सेंगर को बिना किसी संदेह के दोषी ठहराया गया था। अभी तक कोई अंतिम फैसला या आदेश नहीं आया है, सुनवाई पूरी होने के बाद आगे की जानकारी आएगी।
पृष्ठभूमि: हाईकोर्ट ने क्यों दी राहत?
23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की सजा निलंबित कर दी थी, क्योंकि उन्होंने 7 साल 5 महीने जेल काट ली है। अपील लंबित होने तक बेल दी गई, लेकिन पीड़िता के पिता की हिरासत मौत के दूसरे मामले में 10 साल की सजा होने से सेंगर अभी जेल में ही हैं। सीबीआई ने इसे कानूनी गलती बताया और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
प्रदर्शन और पीड़िता की अपील
जंतर मंतर पर रविवार को भी प्रदर्शन जारी रहे। पीड़िता और उनके समर्थकों ने सेंगर की बेल रद्द करने की मांग की। पीड़िता ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद रखती हैं, लेकिन देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने राष्ट्रीय नेताओं से हस्तक्षेप की अपील की थी। सेंगर की बेटी ने समर्थकों से धैर्य रखने को कहा।
यह मामला राजनीतिक शक्ति और न्याय व्यवस्था के टकराव का प्रतीक बना हुआ है। आगे की सुनवाई या फैसले पर नजर रहेगी।

