सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था, जो लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद की घटना थी। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई और 90 से अधिक घायल हुए। केंद्र सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। हालांकि, याचिका में दावा किया गया है कि वांगचुक ने हमेशा शांतिपूर्ण विरोध का समर्थन किया और 24 सितंबर की हिंसा को उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर “उनकी जिंदगी का सबसे दुखद दिन” बताते हुए निंदा की थी।
मामले का पृष्ठभूमि
लद्दाख में पिछले कई महीनों से स्थानीय लोग राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल होने की मांग कर रहे हैं, ताकि क्षेत्र की संस्कृति, पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों की रक्षा हो सके।
लेह एपेक्स बॉडी (LAB) जैसे संगठन इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। 17 नवंबर को LAB ने गृह मंत्रालय को 29 पृष्ठों का एक ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंपा, जिसमें लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और NSA हिरासत में बंद कैदियों, जिनमें वांगचुक शामिल हैं, की रिहाई की मांग की गई।
याचिका में कहा गया है कि हिरासत का आदेश पुरानी और अप्रासंगिक एफआईआर पर आधारित है, जो वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास है। NSA की धारा 8 के अनुसार, हिरासत के आधार पांच दिनों के अंदर (विशेष परिस्थितियों में 10 दिनों के अंदर) कैदी को बताए जाने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वांगचुक के वकील ने तर्क दिया है कि यह “कानून-व्यवस्था” का मामला है, न कि “सार्वजनिक व्यवस्था” या राज्य सुरक्षा का, जो NSA के दुरुपयोग को एक बार फिर से जगजाहिर कर दिया है।
कानूनी विवाद का केंद्र
मुख्य मुद्दा यह है कि क्या वांगचुक की गतिविधियों से वास्तव में सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई। याचिका में कहा गया है कि तीन दशकों से अधिक समय से शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वाले वांगचुक को अचानक निशाना बनाना अविश्वसनीय है। सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर को केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा था। इससे पहले 6 अक्टूबर को हेबियस कॉर्पस याचिका पर नोटिस जारी किया गया था।
लद्दाख के लेह में शोक सभाओं और विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। मार्टर्स मेमोरियल पार्क जैसे स्थानों पर लोग अपने अधिकारों के लिए एकजुट हो रहे हैं। क्षेत्र पाकिस्तान और चीन की सीमा से लगे होने के कारण रणनीतिक महत्व का है, और स्थानीय मांगें केंद्र सरकार के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
अपेक्षाएं और प्रभाव
सुनवाई के दौरान वांगचुक की रिहाई या हिरासत के आधारों की समीक्षा पर जोर दिया जा सकता है। यदि कोर्ट हिरासत को अवैध ठहराता है, तो यह NSA के दुरुपयोग पर एक महत्वपूर्ण फैसला साबित हो सकता है। गितांजलि अंगमो ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी हस्तक्षेप की अपील की है, इसे “विच-हंट” करार देते हुए।
सोशल मीडिया पर #SonamWangchuk और #LadakhStatehood जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग शांतिपूर्ण समर्थन जता रहे हैं। सुनवाई के लाइव अपडेट्स के लिए प्रमुख न्यूज चैनल्स पर नजर रखें। यह मामला न केवल वांगचुक की आजादी का, बल्कि लद्दाख की लोकतांत्रिक आवाज का प्रतीक बन चुका है।

