Olympic gold medalist Mohammad Shahid: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत रविवार को 13 मकानों और दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया। इनमें पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और 1980 मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने वाले ‘हॉकी के जादूगर’ मोहम्मद शाहिद का पैतृक घर भी शामिल था। पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित शाहिद के परिवार ने कार्रवाई रोकने के लिए हाथ-पैर जोड़कर एक दिन की मोहलत मांगी, लेकिन प्रशासन ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच भी तीखी बहस छेड़ दी है।
मोहम्मद शाहिद (1960-2002) भारतीय हॉकी के उन चुनिंदा सितारों में शुमार थे, जिन्होंने 1970-80 के दशक में अपनी बेजोड़ ड्रिबलिंग और स्पीड से देश को कई अंतरराष्ट्रीय जीत दिलाईं। 1980 के मॉस्को ओलंपिक में भारत को 32 वर्षों बाद स्वर्ण पदक दिलाने में उनकी भूमिका अहम थी। 1986 में मात्र 26 वर्ष की आयु में उन्हें पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया था। वाराणसी के कचहरी इलाके में स्थित उनका तीन मंजिला पैतृक मकान न केवल परिवार का आशियाना था, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र भी। सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत इस मकान के 43 वर्ग मीटर हिस्से पर कार्रवाई हुई, जो कचहरी चौराहा से संदहा चौराहा तक फोर-लेन सड़क बनाने का हिस्सा है।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि शनिवार को घर में एक शादी समारोह होने वाला था, इसलिए उन्होंने प्रशासन से एक दिन की मोहलत की गुजारिश की। शाहिद के भाई ने कहा, “हम विकास के पक्ष में हैं और मुआवजा भी स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन कम से कम शादी तक तो इंतजार कर लेते। हमने हाथ जोड़कर अनुरोध किया, लेकिन बुलडोजर आ गया।” परिवार ने पहले ही मेयर अशोक तिवारी को पत्र लिखकर मकान को ध्वस्त करने के बाद भी एक मेमोरियल बनाने की मांग की थी, ताकि शाहिद की स्मृति बरकरार रहे। हालांकि, रविवार को साढ़े 12 बजे शुरू हुई कार्रवाई में न केवल शाहिद का मकान, बल्कि आसपास की दयाम खान मस्जिद के कथित अतिक्रमण को भी ढहा दिया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित सड़क परियोजना का हिस्सा है, और प्रभावित परिवारों को मुआवजा प्रदान किया जा चुका है। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया, “सभी प्रभावित पक्षों को पूर्व सूचना दी गई थी। विकास कार्यों में देरी नहीं हो सकती।” हालांकि, परिवार का आरोप है कि मुआवजा अपर्याप्त है और प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही।
इस घटना ने राजनीतिक हलकों में आग लगा दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने इसे भाजपा सरकार की ‘बुलडोजर राजनीति’ और ‘मुस्लिम विरोधी नीति’ का प्रमाण बताया। AAP सांसद संजय सिंह ने कहा, “मोदी सरकार अडानी को 1050 एकड़ जमीन 1 रुपये में दे सकती है, लेकिन देश के हीरो शाहिद के परिवार को एक घर नहीं। यह राष्ट्रीय नायक का अपमान है।” AAP के आधिकारिक हैंडल ने इसे ‘महान हस्तियों को निशाना बनाने’ की साजिश करार दिया। सोशल मीडिया पर #VaranasiBulldozer और #MohammadShahid जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां हजारों यूजर्स ने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे की विडंबना बताया।
परिवार और विपक्ष ने उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल सम्मानजनक आवास, पर्याप्त मुआवजा और सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। शाहिद की पत्नी परवीन ने कहा, “शाहिद साहब ने देश के लिए सब कुछ दिया, अब हमारा घर छीन लिया गया। कम से कम उनकी यादें तो बचाएं।” यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि राष्ट्रीय नायकों के सम्मान पर सवाल उठाती है। प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन मामला अब राज्य स्तर पर पहुंच चुका है।

