AIIMS में 2,366 डॉक्टरों के पद खाली: देश के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी अस्पतालों, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (AIIMS) में डॉक्टरों की भारी कमी का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया है कि आखिर ये रिक्तियां कब तक भरी जाएंगी।
संसद में आया चौंकाने वाला आंकड़ा
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों में बताया कि 20 कार्यात्मक AIIMS में कुल 6,297 फैकल्टी पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 2,356 अभी भी खाली हैं। गैर-फैकल्टी श्रेणी में 58,994 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 17,205 पद रिक्त हैं। इस तरह कुल मिलाकर 20 AIIMS और केंद्रीय संस्थानों में करीब 19,561 पद खाली पड़े हैं।
AIIMS दिल्ली में सबसे ज़्यादा खाली पद
आंकड़ों के अनुसार AIIMS नई दिल्ली में 1,306 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 446 रिक्त हैं, जबकि गैर-फैकल्टी के 13,911 स्वीकृत पदों में से 2,542 खाली हैं। AIIMS जोधपुर में 405 में से 184, AIIMS मदुरई में 183 में से 113, और AIIMS मंगलागिरी में 309 में से 138 फैकल्टी पद रिक्त हैं।
अन्य प्रमुख केंद्रीय संस्थानों का हाल
JIPMER पुडुचेरी में 827 तकनीकी पदों में से 233 और PGIMER चंडीगढ़ में 1,674 तकनीकी पदों में से 493 रिक्त हैं। इसके अलावा सफदरजंग अस्पताल, RML अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज जैसे केंद्रीय अस्पतालों में भी डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं।
सरकार का जवाब
मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि रिक्त पदों को भरना एक सतत प्रक्रिया है। खाली पदों का नियमित रूप से आकलन किया जाता है और UPSC, NTA, SSC तथा अन्य भर्ती एजेंसियों को मांग-पत्र भेजे जाते हैं। AIIMS दिल्ली नर्सिंग ऑफिसरों की भर्ती के लिए NORCET परीक्षा और ग्रुप B व C पदों के लिए CRE परीक्षा आयोजित करता है।
NMC ने भी दी थी चेतावनी
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने पटना उच्च न्यायालय के एक आदेश के अनुपालन में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चिकित्सा शिक्षा विभागों को मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पदों को तत्काल भरने के निर्देश दिए थे और इसके लिए छह महीने की समयसीमा तय की गई थी।
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस ने इन आंकड़ों को हथियार बनाते हुए सरकार से पूछा है कि जब देश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में हजारों पद खाली हैं, तो आम मरीजों को इलाज कैसे मिलेगा? पार्टी का कहना है कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा को दर्शाता है और सरकार को तत्काल भर्ती अभियान चलाना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां मरीज-डॉक्टर अनुपात को बिगाड़ती हैं और मौजूदा डॉक्टरों पर काम का बोझ असहनीय हो जाता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मुद्दे पर कितनी तेजी से कदम उठाती है।

