प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज: संसद में उठे एक बड़े उपभोक्ता मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों की सहमति बन गई है। प्रीपेड मोबाइल प्लान की 28 दिनों की वैलिडिटी के कारण ग्राहकों को पूरे साल में 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, जबकि 12 महीनों में सिर्फ 12 रिचार्ज पर्याप्त होने चाहिए। दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में स्पष्ट कहा कि 30 दिनों वाले प्लान पहले से उपलब्ध हैं और टेलीकॉम कंपनियों (Airtel, Jio, Vi) को इन्हें ज्यादा प्रमोट करने के निर्देश दिए गए हैं।
समस्या क्या है?
ज्यादातर “मंथली” प्लान सिर्फ 28 दिनों के लिए वैलिड होते हैं। 28 × 12 = 336 दिन (लगभग 11 महीने)। पूरे 365 दिनों के लिए 13वां रिचार्ज जरूरी हो जाता है (28 × 13 = 364 दिन)। इससे उपभोक्ताओं पर सालाना एक अतिरिक्त रिचार्ज का बोझ पड़ता है, जिसे कई सांसद “छिपा हुआ टैक्स” या “लूट” बता रहे हैं। AAP सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने मांग की कि सभी मंथली प्लान की वैलिडिटी 30 या 31 दिनों (कैलेंडर मंथ) की होनी चाहिए। साथ ही, रिचार्ज खत्म होने के बाद भी इनकमिंग कॉल्स और SMS कम से कम एक साल तक चालू रहने चाहिए, ताकि OTP, बैंक अलर्ट आदि बाधित न हों।
TRAI का नियम और वर्तमान स्थिति
TRAI ने 2022 में ही टैरिफ ऑर्डर जारी कर सभी ऑपरेटर्स को हर कैटेगरी (प्लान वाउचर, कॉम्बो वाउचर, स्पेशल टैरिफ वाउचर) में कम से कम एक 30 दिनों का प्लान अनिवार्य रूप से ऑफर करने को कहा था। कंपनियां इस नियम का पालन कर रही हैं, लेकिन, 28 दिनों वाले प्लान में ज्यादा वैरायटी (अनलिमिटेड कॉल्स + ज्यादा डेटा + OTT बेनिफिट) उपलब्ध है। 30 दिनों वाले प्लान कम हैं और अक्सर महंगे या कम आकर्षक लगते हैं। उदाहरण: Airtel की वेबसाइट पर 28 दिनों में कई प्लान उपलब्ध हैं, जबकि 30 दिनों में विकल्प सीमित। मजबूरी में ज्यादातर ग्राहक को 28 दिनों वाले प्लान ही चुनना पड़ता हैं।
सरकार क्या कर रही है?
कंपनियों को 30 दिनों के प्लान को सक्रिय रूप से प्रमोट करने के लिए कहा गया है। TRAI वर्तमान में रिचार्ज प्लान की वैलिडिटी और इनकमिंग सर्विस के मुद्दे पर फिर से समीक्षा कर रहा है। अभी 28 दिनों के प्लान पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन सरकार और TRAI उपभोक्ता हित में बदलाव की दिशा में काम कर रहे हैं।
उपभोक्ताओं को फायदा क्या होगा?
यदि 30 दिनों के प्लान में वैरायटी बढ़ाई जाए और उन्हें सस्ता/आकर्षक बनाया जाए, तो ग्राहक साल में सिर्फ 12 रिचार्ज पर ही काम चला सकेंगे। इससे सालाना 8% तक की बचत हो सकती है (खासकर कम आय वाले परिवारों के लिए)। साथ ही, डेटा रोलओवर और लंबी इनकमिंग वैलिडिटी जैसी मांगों पर भी विचार हो रहा है।
टेलीकॉम कंपनियों का पक्ष
कंपनियां 28 दिनों की वैलिडिटी को 4 हफ्तों के बिलिंग साइकल से जोड़ती हैं। वे कहती हैं कि 30 दिनों के प्लान में टेक्निकल और मार्केटिंग चुनौतियां हैं। हालांकि, अब सरकार के दबाव में उन्हें 30 दिनों के विकल्प को ज्यादा जोर देना पड़ेगा।
निष्कर्ष: यह मुद्दा करोड़ों प्रीपेड यूजर्स (देश के करीब 90% मोबाइल यूजर्स) से जुड़ा है। संसद में सरकार-विपक्ष की एकता और TRAI की समीक्षा से उम्मीद है कि जल्द ही रिचार्ज सिस्टम ज्यादा उपभोक्ता-अनुकूल बनेगा। फिलहाल यूजर्स को सलाह है कि उपलब्ध 30 दिनों के प्लान चेक करें और कंपनियों से भी 30-दिन वैलिडिटी वाले विकल्प मांगें। जैसे ही TRAI कोई नया आदेश या बदलाव जारी करेगी, स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। यह कदम आम आदमी के मोबाइल खर्च को थोड़ा और किफायती बनाने की दिशा में सकारात्मक है।

