रूठे मॉनसून से सूखे मोदी सरकार के अरमान

कुछ महीनों पहले मौसम विभाग ने खुल्ला दावा किया था कि इस साल देश में अच्छा मानसून आएगा, तो इससे सबसे बड़ी राहत अर्थजगत को मिली. केंद्र की सत्ता में बैठी नरेंद्र मोदी सरकार भी खुश थी. क्योंकि इससे उसे उम्मीद बंधी कि अच्छे मॉनसून के बाद 2019 के शुरुआत में होने वाले आम चुनावों से पहले उसे बेहतरीन आर्थिक आंकड़े मिलेंगे जिसके जरिए वह मजबूती के साथ अपने प्रचार अभियान को चलाते हुए सत्ता में बने रहने के अपने प्लान को सफल कर लेगी. अच्छे मॉनसून की उम्मीद से केन्द्र सरकार को किसानों की आमदनी को दोगुना करने का अपना संकल्प और उसके जरिए किसानों के अच्छे दिन लाने का फॉर्मूला दिख गया. इसके चलते केन्द्र सरकार ने खरीफ फसलों की एमएसपी में 50 फीसदी का इजाफा करने का फैसला लिया. हालांकि केन्द्र सरकार ने जिस फॉर्मूले का ऐलान किया वह प्रभावी तौर पर एमएसपी में महज एक-तिहाई का इजाफा दिखा रही है. गौरतलब है कि स्वामीनाथन कमेटी ने किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए एमएसपी में 50 फीसदी के इजाफे की सिफारिश की थी. लेकिन केन्द्र सरकार ने यह इजाफा फसल में लागत और किसान परिवार की मेहनत को जोड़कर किया जिसके चलते किसानों को अपनी पैदावार पर 50 फीसदी की जगह महज 12 फीसदी से संतोष करना पड़ेगा. साफ है यह फायदा भी तब मिलेगा जब किसान सरकार के खरीद केन्द्र पर अपनी फसल बेच सकेगा.

 

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