राम मंदिर दान चोरी: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी SIT से मांगी जांच की स्थिति रिपोर्ट, सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई जारी

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान की कथित चोरी और हेराफेरी के मामले ने अब देश की सर्वोच्च अदालत में गंभीर मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई 2026) को इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश की विशेष जांच टीम (SIT) से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच (जस्टिस जोयमल्या बागची और वी. मोहना सहित) ने राम मंदिर दान चोरी से जुड़ी तीन याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं में राजद सांसद सुधाकर सिंह, वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव शामिल हैं। याचिकाओं में कोर्ट-मॉनिटर्ड सीबीआई जांच, फोरेंसिक ऑडिट और ट्रस्ट के दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।

SIT जांच में क्या सामने आया?

उत्तर प्रदेश सरकार ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर इस मामले की जांच के लिए SIT गठित की थी। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में गिनती कक्ष में गंभीर सुरक्षा चूक उजागर हुई हैं। आरोप है कि लगभग 40 दिनों में करीब 70 बार चोरी हुई। मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। रिपोर्ट में शुक्ला की बैंक गतिविधियों और उसकी आय के बीच भारी अंतर पाया गया। ट्रस्ट के कर्मचारियों को कम वेतन मिलने के बावजूद संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। SIT ने अभी किसी को क्लीन चिट नहीं दी है। मंदिर ट्रस्ट के एक सदस्य ने भी निष्पक्ष जांच का समर्थन किया है।

याचिकाओं में मुख्य मांगें

सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कोर्ट-मॉनिटर्ड जांच। दान की गिनती, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और ट्रस्ट दस्तावेजों का संरक्षण। ट्रस्ट की वेबसाइट पर दान की जानकारी लाइव सार्वजनिक करने की व्यवस्था। पूरे मामले का फोरेंसिक ऑडिट। सुप्रीम कोर्ट ने पहले याचिकाओं पर तुरंत सुनवाई से इनकार किया था, लेकिन अब स्थिति रिपोर्ट मांगकर मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे बढ़ाया है। यह एक विकासशील कहानी है और अदालत की अगली सुनवाई में SIT रिपोर्ट का अध्ययन महत्वपूर्ण होगा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने SIT जांच को “आंखों में धूल झोंकने वाली” करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट-मॉनिटर्ड CBI जांच की मांग की है। वहीं, भाजपा और ट्रस्ट से जुड़े लोग मामले को राजनीतिक साजिश बताते हुए पूर्ण जांच का समर्थन कर रहे हैं। राम मंदिर देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। दान की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना न केवल कानूनी, बल्कि नैतिक दायित्व भी है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम पूरे मामले में निष्पक्षता और जवाबदेही स्थापित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अदालत SIT की रिपोर्ट आने के बाद आगे का रुख तय करेगी। पाठकों को सलाह है कि आधिकारिक सूत्रों और अदालती अपडेट पर नजर रखें।

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