प्राधिकरण के फ्लैट भी खस्ताहाल

छोटे बिल्डरों पर प्रशासन शिकंजा कस रहा है लेकिन प्राधिकरण द्वारा सेक्टर-15, 12, 22, 34, 36, 40, 56 आदि में बनाए गए फ्लैटों की हालत दैनिय स्थिति में है। ‘जय हिन्द जनाबÓ ने सेक्टरों में जाकर यहां रह रहे लोगों से बातचीत की तो उनकी आंखों में आंसू झलक उठे, कहा कि हम कहां जाएं। इस मामले को लेकर अब वे प्राधिकरण से भी गुहार लगाएंगे ताकि फ्लैट्स की मरम्मत कराई जा सके। कई स्थानों पर फ्लैटों में अतिरिक्त निर्माण भी कराया गया है। जिससे इमारत गिरने का और ज्यादा डर बना हुआ है।

नोएडा। अवैध निर्माण को लेकर अलग-अलग स्थानों पर प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है। मगर, नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में नोएडा प्राधिकरण द्वारा बनाए गए जनता और एलआईजी फ्लैट खस्ता हालत में है। फिलहाल प्राधिकरण भी इनकी सुध लेता नहीं दिख रहा। तीन मंजिले फ्लैट्स को बने सालों हो चुके हैं। अब इनमें लगा सीमेंट और बालू झड़ चुका है और सरिया बाहर निकल रहे हैं। ‘जय हिंद जनाबÓ टीम ने सेक्टर-15 में झज्जर हालत में पड़े फ्लैट्स का दौरा किया और इन में रह रहे लोगों से बातचीत की तो हर एक व्यक्ति के मन में डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि प्राधिकरण चाहे तो फ्लैट्स की खस्ता हालात को सुधार सकता है।
वहीं, सेक्टर 40 में फ्लैट नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों को प्राधिकरण द्वारा आवंटित किए गए हैं लेकिन यह फ्लैट भी इतनी ज्यादा खस्ता हालत में है कि जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ कर नीचे गिर गया है। जहां से भी प्लास्टर झड़ता है वहां-वहां लोग प्लास्टर करा लेते हैं। मगर इस पर किसी का ध्यान नहीं है। अलग-अलग स्थानों पर बने इन फ्लैट की मरम्मत बेहद जरूरी है ताकि डर के साए में रह रहे लोग चैन की सांस ले सकें। बताया जाता है कि नोएडा प्राधिकरण ने 90 के दशक में यह फ्लैट बनवाए थे ऊंचाई अधिक न होने के कारण अब तक ये चल रहे हैं। लेकिन कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सेक्टर 40 में रह रहे अमित ने बताया कि उनके कमरों में कभी भी प्लास्टर झड़ जाता है। झड़ते ही ऐसा लगता है मानो मकान गिरने वाला है। उधर, सेक्टर 34 में जनता फ्लैट्स के भी हालात बदतर हैं। यहां लोग रह तो रहे हैं मगर उन्हें डर सताता रहता है कि न जाने कब वे इसके नीचे दब जाएं। यही हालत सेक्टर 56 में बने फ्लैटों की भी है। यहां भी एलआईजी और जनता फ्लैट्स खस्ता हालत में है।

अग्नि सुरक्षा अधिनियम 2005 का किस कदर मखौल उड़ रहा है इसका अंदाजा इसी बात से लग सकता है कि फायर स्टेशन के सामने गांव हरौला में ऊंची-ऊंची इमारतें बनी हैं। जिनकी उचाई 15 मीटर से ऊपर है। मगर कभी दमकल विभाग की ओर से इन पर ध्यान नहीं दिया गया। यहां पर सीओ स्वयं बैठते हैं और एफएसओ भी दिन में कई-कई बार इन इमारतों को देखते हुए निकलते हैं। मगर दोनों ही अधिकारियों को अग्नि सुरक्षा अधिनियम 2005 की याद नहीं आई। इस अधिनियम के तहत 15 मीटर से ऊंची इमारतों का निरीक्षण कर उन्हें नोटिस देकर सील कराने तक की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि सीएफओ इस मामले में कानूनी दांव पेच बता कर कार्रवाई न करने की बात कहते हैं।

ग्रेटर नोएडा में भी हालत खराब
ग्रेटर नोएडा। बिल्डर तो बिल्डर प्राधिकरण की बनाई हुई इमारतें भी झज्जर हालात में पड़ी हैं। पाई-1 की गुलमोहर सोसायटी में बने फ्लैट खस्ताहालत में है अब यहां बिल्डिंग से प्लास्टर गिर रहा है। भी गिरा बिल्डिंग का एक हिस्सा, रेजिडेंट्स का आरोप, कई बार लिखित में शिकायत के बाद भी ऑथोरिटी ने नही सुनी फरियाद, डर के साए में जीने को मजबूर है रेजिडेंट्स, निजी बिल्डरो की
अवैध बिल्डिंग पर कार्रवाई के बाद क्या खुद प्राधिकरण द्वारा निर्माण की गई जर्जर बिल्डिंग की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई।

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