तीन सौ बरस पुरानी इस्लामिक पद्धति से रोग होंगे छूमंतर

उपचार इतना सस्ता है कि गरीब से गरीब भी उपचार करा सकता है। जैन ने बताया कि इस पद्धति के तहत नेगेटिव सक्शन कप गम को शरीर के किसी भी पार्ट से चिपका दिया जाता है।

गाजियाबाद। तीन सौ बरस पुरानी इस्लामिक कपिंग थेरेपी पद्धति आपकी काया को निरोग बना देगी। दिल, दिमाग से लेकर हडडी के गंभीर रोगों को खत्म करन की कुव्वत इस प्राचीन पद्धति में है। गंभीर रोग से पीडि़त कई मरीजों को कपिंग थेरेपी से रिलीफ भी मिला है। कपिंग थेरेपिस्ट अनुज जैन ने इस प्राचीन पद्धति के बारे में तफ्सील से बताया।
बकौल अनुज जैन इस सिस्टम से कैंसर, लीवर, किडनी, ब्रेन, बॉन समेत शरीर में पनपने वाली तमाम बीमारियों का उपचार संभव है। वे बताते हैं कि गाजियाबाद राकेश मार्ग के पास गुलमोहर इन्क्लेव में वे इस इस्लामिक पद्धति से लोगों का उपचार कर रहे हैं। उपचार इतना सस्ता है कि गरीब से गरीब भी उपचार करा सकता है। जैन ने बताया कि इस पद्धति के तहत नेगेटिव सक्शन कप गम को शरीर के किसी भी पार्ट से चिपका दिया जाता है। जहां कप चिपकाया जाता है, वहीं शरीर का गंदा ब्लड (टॉक्सिन, म्यूरिक एसिड व डेड ब्लड सेल्स) जमा हो जाता है। सक्शन कप की मदद से इस गंदे ब्लड को बाहर निकाल लिया जाता है। ये गंदा ब्लड ही शरीर में विकृतियां पैदा करता है। इस इस्लामिक मेडिकल सिस्टम से हर गंभीर बीमारी का इलाज मुमकिन है। बाय का दर्द, हडडी का दर्द में तो से प्राचीन पद्धति रामबाड़ बताई जा रही है।

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