घोटालेबाजों की घेराबंदी में जुटी पुलिस

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में डीसीईओ बन कर आए पीसीएस अफसर पीसी गुप्ता का प्रमोशन भी यही हुआ और वह आईएएस अफसर बन गए। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में एसीईओ के पद पर तैनात किए गए। बाद में उन्हें यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण का सीईओ बनाया गया।
अपने लंबे कार्यकाल के दौरान पीसी गुप्ता ने दर्जनों पेंडिंग पड़ी फाइलें पास की। यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण में रहते हुए प्राधिकरण को 100 करोड़ से अधिक रुपए का चूना लगाने के आरोप अब उन पर लग रहे हैं। इतना ही नहीं पीसी गुप्ता समेत दर्जनों अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस साक्ष्य जुटा रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। इस संबंध में एसएसपी के पीआरओ ने बताया कि इस मामले में जांच अधिकारी ने कुछ साक्ष्य जुटाए हैं और गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दबिश दी है।
बताया जा रहा है कि पीसी गुप्ता ने अपने कुछ रिश्तेदारों और परिवार वालों के जरिए किसानों से सस्ती दरों में जमीन खरीदी और फिर उसे प्राधिकरण को ही महंगे दामों में बिकवा दी।
जब यह मामला मेरठ मंडल के कमिश्नर एवं प्राधिकरण के चेयरमैन डॉक्टर प्रभात कुमार के संज्ञान में आया तो उन्होंने इस मामले में तत्काल रिपोर्ट दर्ज कराई। पीसी गुप्ता की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
इस संबंध में पीसी गुप्ता से बातचीत करने के लिए उन्हें संपर्क किया गया मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इस पूरे घोटाले में पीसी गुप्ता के भतीजे का
नाम भी प्रमुखता से सामने आ
रहा है।

लंबा सफर

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में डीसीईओ बनकर आए और प्रमोशन हुआ एसीईओ बने फिर यमुना प्राधिकरण में सीईओ का मिला था चार्ज

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