कौन कौन सी पार्टियां हो सकती हैं महाअघाड़ी

दिल्ली : गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 विधानसभा सीटों के लिए 19 अक्टूबर को हुई मतगणना में बीजेपी 123 सीटें हासिल कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी. जबकि शिवसेना दूसरे और सत्तारूढ़ कांग्रेस यहां तीसरे स्थान पर खिसक गई थी. साल 2014 के विधानसभा में वोट फीसदी देखा जाए तो बीजेपी को 31.15 फीसदी वोट मिले थे और शिवसेना को 19.3 फीसदी वोट मिले थे. कांग्रेस के वोट में करीब 18 फीसदी गिरावट आई थी और उसे 18.10 फीसदी वोट मिले थे. वहीं एनसीपी को 17. 96 फीसदी वोट मिले थे. वहां पर कुछ-कुछ सीटों पर चुनाव लडऩे वाली पार्टियों ने भी अपना रंग दिखाया था।

दलितों से बेरूखी
किसानों से उबरी बीजेपी सरकार के सामने दूसरा मुद्दा दलित समुदाय के भड़कने का उभरा. 2018 की शुरुआत महाराष्ट्र के पुणे के पास स्थित भीमा-कोरेगांव में भड़की जातीय हिंसा से हुआ जो कि पिछले दो दिनों से महाराष्ट्र के पुणे और आसपास के क्षेत्र में फैलती गई. इस मुद्दे ने कांग्रेस एनसीपी के साथ साथ बहुजन समाज पार्टी ने भी महाराष्ट्र की राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर दलितों की बेरूखी का आरोप लगाया. महाराष्ट्र में 10 फीसदी से ज्यादा दलित मतदाता हैं और 288 विधानसभा सीटों में से करीब 60 सीटें ऐसी हैं जहां दलित मतदाता किसी राजनीतिक खिलाड़ी के लिए अहम साबित हो सकते हैं. यहां तक कि लोकसभा चुनाव में 10 से 12 सीटों पर दलित वोट उम्मीदवार की हार जीत का निर्णय करेगा।

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