चुनाव समाप्त, चर्चाएं शुरू

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मोहम्मद आजाद
नोएडा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ सीटों के लिए कल मतदान हो गया। कुल मिलाकर मतदान की कुछ प्रतिशत बढ़ी और साथ उम्मीदवारों की चिंता भी। समाप्त हो गया है, लेकिन आठों सीटों पर हार जीत को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
बीजेपी, गठबंधन और कांग्रेस समर्थक अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत के दावे ठोक रहे हैं। लेकिन उम्मीदवारों की पेशानी पसीने-पसीने है। लगता है कि यह पसीना 23 मई तक सूखने वाला नहीं है, क्योंकि इस बार हार जीत बहुत करीब है। रोज नए आंकड़े सामने आएंगे। ये आंकड़े उम्मीदवारों की धड़कनों को बढ़ाएंगे।
आठों सीटों में अगर गौतमबुद्ध नगर की बात करें तो यहां बीजेपी के डॉ महेश शर्मा और गठबंधन के सतवीर नागर की हार जीत का आधार कांग्रेस उम्मीदवार अरविंद सिंह पर टिका है। अगर वह ठाकुरों की ज्यादा वोट ले गए तो डॉ. महेश शर्मा के लिए मुश्किल हो सकती है और कम वोट ले पाए तो गठबंधन उम्मीदवार सतवीर नागर को नंबर दो पर संतोष करना पड़ेगा।
गाजियाबाद लोकसभा सीट की स्थिति अत्यंत दिलचस्प है। यहां गठबंधन उम्मीदवार सुरेश बंसल और केेंद्रीय मंत्री वीके सिंह आमने-सामने हैं। पिछले बार वे बड़े अंतर से जीते थे इस बार खतरा यह है कि छोटे अंतर से हार न जाएं, क्योंकि गठबंधन उम्मीदवार के पक्ष में दलित, मुस्लिम, यादव व वैश्य समाज का जबरदस्त पोलिंग हुआ है। कांग्रेस उम्मीदवार डॉली शर्मा भी वीके सिंह को नुकसान पहुंचा रही हैं।
मेरठ में गठबंधन उम्मीदवार हाजी याकूब और बीजेपी उम्मीदवार राजेंद्र अग्रवाल में कांटे की टक्कर है। यहां भी कांग्रेस उम्मीदवार हरेंद्र अग्रवाल भाजपा उम्मीदवार को पलीता लगा रहे हैं।
मुजफ्फरनगर में गठबंधन के रालोद उम्मीदवार चौ. अजीत सिंह पूर्व केेंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान को न केवल जबरदस्त टक्कर दे रहे हैं बल्कि उन पर भारी दिखाई पड़ रहे हैं।
बिजनौर में कांग्रेस उम्मीदवार नसीमुद्दीन सिद्दीकी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। उन्हीं के शिष्य रहे गठबंधन उम्मीदवार मलूक नागर के साथ-साथ भाजपा उम्मीदवार भारतेंदु से उन्हें कड़ी टक्कर मिल रही है। मामला यहां त्रिकोणीय है और ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है।
कैराना में गठबंधन उम्मीदवार सांसद तबस्सुम हसन एक बार फिर भाजपा उम्मीदवार प्रदीप चौधरी और कांग्रेस के हरेंद्र मलिक पर भारी दिख रही हैं।
सहारनपुर में सांसद राघव लखनपाल को सीट बचाना मुश्किल दिख रहा है। उन्हें गठबंधन के हाजी फजलुर्रहमान से तो टक्कर मिल ही रही है। कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद ने यहां के चुनाव को और दिलचस्प बना
दिया है।


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