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]]>BRICS Summit 2026: नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में व्यापक बदलाव का एजेंडा सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि 20 वर्ष पूरे कर चुका ब्रिक्स अब अपने ‘परिपक्वता के दौर’ में पहुंच गया है। ऐसे में संगठन को अगले 20 वर्षों के लिए नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन तक एक व्यापक ‘ब्रिक्स सुधार रोडमैप’ का रूप देने का प्रस्ताव रखा।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच लंबी बातचीत के बाद संयुक्त दिल्ली घोषणा पर भी सहमति बनी। घोषणा में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का आह्वान किया गया। BRICS Summit 2026:

प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स ने पिछले 20 वर्षों में वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए सहमति के आधार पर आगे बढ़ते हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने में विश्वास रखता है। अब संगठन के भीतर बनी एकजुटता और सहमति को वैश्विक स्तर पर ठोस परिणामों में बदलने का समय है।
मोदी ने कहा कि मानव जीवन में 20 वर्ष की उम्र परिपक्वता और नई जिम्मेदारियों का चरण माना जाता है। उसी तरह ब्रिक्स भी अपने ‘कमिंग ऑफ एज’ के दौर में पहुंच चुका है। अब इसकी क्षमताओं को नई दिशा देने की जरूरत है। BRICS Summit 2026:
प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था की तुलना एक ऐसे पिरामिड से की, जिसमें शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तर पर वे देश हैं जो इन फैसलों से प्रभावित तो होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में उनकी भूमिका सीमित है।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने वाले केंद्रों से बाहर है। इस ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि भविष्य साझा है तो उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए। उन्होंने ‘आवाज से प्रभाव’ और ‘विशेषाधिकार से साझेदारी’ की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
BRICS Summit 2026:
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों से वैश्विक शासन सुधार के लिए मिलकर 10 प्रस्ताव तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों को अगले शिखर सम्मेलन तक ब्रिक्स सुधार रोडमैप का रूप दिया जा सकता है।
इस रोडमैप के लिए उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही- प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण।
प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और नहीं टालने की जरूरत बताई। उन्होंने वैश्विक वित्तीय संस्थानों में मतदान अधिकार, नेतृत्व के पदों और नीतिगत प्राथमिकताओं को मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की भी पैरवी की।
नियम-निर्माण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां भविष्य की दिशा तय कर रही हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों से जुड़े वैश्विक नियम बनाने में सभी देशों की समान भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो देश वैश्विक आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक शासन को आकार देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए।
BRICS Summit 2026:
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘ब्रिक्स कंटिन्युटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है। ऐसे में संस्थागत गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। प्रस्तावित तंत्र के जरिए ट्रोइका व्यवस्था के माध्यम से ब्रिक्स की पहलों और निर्णयों पर निरंतर अमल तथा उनकी समीक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त दिल्ली घोषणा पर सहमति बनना भी महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, घोषणा को लेकर सदस्य देशों के बीच बातचीत देर रात तक चली। कई महत्वपूर्ण और विवादित मुद्दों पर मतभेद मौजूद थे।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को साझा बयान के लिए सहमत कराना भारत के लिए बड़ी चुनौती थी। भारत ने लगातार बातचीत के जरिए मतभेदों को दूर करने की कोशिश की और सभी देशों को साझा रुख पर लाने में सफलता हासिल की।
इससे पहले मई में हुई ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक आम सहमति नहीं बन पाने के कारण संयुक्त बयान के बिना समाप्त हुई थी। उस समय भारत ने अध्यक्ष का बयान और परिणाम दस्तावेज जारी किया था।
BRICS Summit 2026:
ब्रिक्स की दिल्ली घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का आह्वान किया। घोषणा में कहा गया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
घोषणा में आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों और उन्हें समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराने की बात भी कही गई।

ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद से निपटने के वैश्विक प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। घोषणा में ब्रिक्स काउंटर-टेररिज्म वर्किंग ग्रुप और उसके उप-समूहों की गतिविधियों का स्वागत किया गया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को जल्द अंतिम रूप देने और अपनाने का आह्वान किया गया।
BRICS Summit 2026:
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को जन-केंद्रित और ‘मानवता प्रथम’ दृष्टिकोण पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने अध्यक्षता के दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता दी। उन्होंने बताया कि इस दौरान 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं और करीब 30 भारतीय शहरों में विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया गया। भारत का प्रयास ब्रिक्स सहयोग को आम लोगों से जोड़ने का रहा।

भारत मंडपम में ब्रिक्स नेताओं के स्वागत के दौरान तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर की भव्य तस्वीर पृष्ठभूमि में दिखाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और अन्य नेताओं का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को मंदिर की पृष्ठभूमि और उसके महत्व के बारे में जानकारी देते हुए भी देखा गया।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रही। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स की ताकत उसकी विविधता, सहमति और समावेशी सोच में है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में यही दृष्टिकोण वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत का संदेश स्पष्ट है कि ब्रिक्स को किसी के खिलाफ खड़े होने के बजाय वैश्विक सहयोग, संवाद और साझा विकास का प्रभावी मंच बनना चाहिए।
BRICS Summit 2026:
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