Kotdwar ‘Mohammad Deepak’ controversy: उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में ‘मोहम्मद दीपक’ विवाद को कवर करने पहुंचे पत्रकारों को कौड़िया बॉर्डर पर रोकने के गंभीर आरोप लगे हैं। कुछ मीडिया कर्मियों द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में दावा किया गया है कि पुलिस और प्रशासन ने भारी बैरिकेडिंग कर पत्रकारों की एंट्री पूरी तरह रोक दी है। प्रशासन का तर्क है कि मीडिया की मौजूदगी से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
मीडिया पर रोक के आरोप वीडियो फुटेज में दिखाया गया है कि कोटद्वार प्रवेश के लिए कौड़िया बॉर्डर पर तीन लेयर की बैरिकेडिंग की गई है और हर वाहन की सघन जांच हो रही है। पत्रकारों का कहना है कि पुलिस अधिकारी (जिनमें एसओ तुषार बोरा का नाम लिया गया) सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें इग्नोर कर रहे हैं या ऑनलाइन जानकारी लेने को कह रहे हैं। आरोप है कि यह सच को दबाने की कोशिश है, जो प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र का उल्लंघन है। भारत की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग (150वें स्थान के आसपास) का हवाला देते हुए पत्रकारों ने इसे मौलिक अधिकारों पर हमला करार दिया।
पृष्ठभूमि:
क्या है ‘मोहम्मद दीपक’ विवाद? यह विवाद 26 जनवरी 2026 को शुरू हुआ, जब कोटद्वार के पटेल मार्ग पर एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार की ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ नामक दुकान का नाम बदलने के लिए बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता दबाव बना रहे थे। जिम संचालक दीपक कुमार ने बुजुर्ग का बचाव किया और खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताकर विरोध जताया। वीडियो वायरल होने पर बजरंग दल ने प्रदर्शन किया, जिसके बाद दीपक समेत कई लोगों पर FIR दर्ज हुई।
पत्रकारों ने भेदभाव का आरोप लगाया कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं (जिनके नाम जैसे नरेश उनियाल, अमन स्वेडिया, भूपी चौधरी लिए गए) द्वारा सड़क जाम और कथित बदसलूकी पर केवल ‘अज्ञात’ लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई, जबकि दीपक पर नामजद मुकदमा दर्ज किया गया। इन कार्यकर्ताओं से पूछताछ न होने का भी दावा किया गया।
विवाद थमा, समझौता हुआ हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस के हस्तक्षेप से विवाद शांत हो गया है। बजरंग दल ने दुकान के नाम ‘बाबा’ को स्वीकार कर लिया और समझौता हो गया। दोनों पक्षों पर FIR दर्ज की गईं, लेकिन बड़े प्रदर्शन या तनाव की कोई नई खबर नहीं है। दीपक कुमार को सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिला, राहुल गांधी ने उन्हें ‘बब्बर शेर’ कहा। दीपक का जिम कुछ समय बंद रहा, लेकिन अब स्थिति सामान्य है।
मीडिया एंट्री रोकने के आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कुछ रिपोर्ट्स में बिजनौर से सटे बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाने की बात कही गई है ताकि बाहरी तत्व माहौल न बिगाड़ें। विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।

