Heated debate on stray dogs in the Supreme Court: ‘कुत्तों को हटाया तो चूहे-बंदर बढ़ेंगे’, जज बोले- ‘तो बिल्लियां ले आएं?’, ABC नियमों पर जोर

Heated debate on stray dogs in the Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों की समस्या पर लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान एनिमल वेलफेयर की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह ने कहा कि अगर सड़कों से आवारा कुत्तों को अचानक हटा दिया गया, तो चूहों और बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है, जिसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने सूरत की पुरानी घटना का जिक्र करते हुए इकोलॉजिकल बैलेंस बनाए रखने की बात कही।

इस दलील पर बेंच ने हल्के-फुल्के अंदाज में लेकिन गंभीर टिप्पणी की- “कुत्ते और बिल्लियां तो स्वाभाविक दुश्मन हैं। बिल्लियां चूहों को मारती हैं, तो क्या हम बिल्लियों की संख्या बढ़ाकर कुत्तों की तादाद कम कर दें?” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों को सड़कों से पूरी तरह हटाने का आदेश नहीं दिया गया है, बल्कि केवल सार्वजनिक संस्थानों (स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन आदि) से हटाने के निर्देश हैं, जहां ये खतरा पैदा कर रहे हैं।

प्रमुख दलीलें और कोर्ट की टिप्पणियां
• सीयू सिंह ने आगे कहा कि बड़ी संख्या में कुत्तों को एक शेल्टर में रखने से बीमारियां फैलने का खतरा है। उन्होंने करीब 91,800 नए शेल्टर्स बनाने की जरूरत बताई। साथ ही, कुत्तों की आबादी पर निगरानी जरूरी है, क्योंकि 2009 के बाद कोई सर्वे नहीं हुआ।

• सीनियर एडवोकेट ध्रुव मेहता और नकुल दीवान ने भी कुत्तों की नसबंदी, वैक्सीनेशन और मॉनिटरिंग पर जोर दिया। एक एनजीओ की ओर से दलील दी गई कि उनकी टीम ने 66,000 से ज्यादा कुत्तों की जान बचाई और 15,000 की नसबंदी कराई।

• कोर्ट ने कुत्तों के व्यवहार पर टिप्पणी की- “कुत्ते इंसान का डर सूंघ लेते हैं और काट सकते हैं। किसी को पता नहीं चलता कि कुत्ता किस मूड में है।” बेंच ने कहा कि इंसानी सुरक्षा सबसे ऊपर है, लेकिन एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम 2023 को सख्ती से लागू करना होगा।
• कोर्ट ने सभी पक्षों (डॉग लवर्स, विक्टिम्स और अथॉरिटीज) को सुनने का आश्वासन दिया। सुनवाई कल भी जारी रहेगी।

पृष्ठभूमि और विवाद
पिछले साल नवंबर में कोर्ट ने संवेदनशील सार्वजनिक जगहों से कुत्तों को हटाकर शेल्टर्स में रखने का आदेश दिया था, जिसके बाद डॉग लवर्स ने प्रदर्शन किए। अब कोर्ट ABC नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर फोकस कर रहा है। देश में डॉग बाइट केस बढ़ रहे हैं, खासकर बच्चों में रेबीज के मामले। दूसरी तरफ एनिमल एक्टिविस्ट्स कुत्तों को ‘रोडेंट कंट्रोल’ बताते हैं।
कोर्ट ने साफ कहा कि समस्या का समाधान क्रूरता नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और संतुलित तरीके से होना चाहिए। मामले पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि अंतिम फैसला लाखों आवारा कुत्तों और लोगों की सुरक्षा को प्रभावित करेगा।

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