संभल में बुलडोजर, नोएडा में बेखौफ अवैध निर्माण, गांवों में धड़ल्ले से बन रहे फ्लैट, प्राधिकरण की कार्रवाई नाकाफी

Noida News: उत्तर प्रदेश में एक तरफ संभल जिले में प्रशासन चुन-चुन कर अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला रहा है, वहीं दूसरी ओर यूपी के सबसे हाईटेक शहर नोएडा में अवैध निर्माण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में शामिल गांव बरौला, सलारपुर, हाजीपुर, भंगेल, सोरखा, बसई और नगला वाजिदपुर सहित कई इलाकों में प्राधिकरण कर अधिसूचित जमीन पर बहुमंजिला फ्लैट, मकान और अवैध कॉलोनियां खड़ी की जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के बावजूद भूमाफिया और बिल्डर बेखौफ होकर निर्माण कार्य जारी रखे हुए हैं।

अवैध निर्माण के खिलाफ कई स्तरों पर कार्रवाई
नोएडा प्राधिकरण द्वारा अब तक अवैध निर्माण के खिलाफ कई स्तरों पर कार्रवाई की गई है। प्राधिकरण की टीमों ने इन गांवों में दर्जनों अवैध इमारतों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए, कई निर्माण स्थलों पर काम रुकवाया गया और कुछ स्थानों पर अवैध हिस्सों को ध्वस्त भी किया गया। इसके अलावा भूमाफियाओं और अवैध निर्माण कराने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है और पुलिस की मदद से जमीन को कब्जामुक्त कराया गया है। प्राधिकरण का दावा है कि हजारों वर्ग मीटर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया और करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को सुरक्षित किया गया है। हालांकि हकीकत ये भी है कि प्राधिकरण की टीम अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर आता है और कुछ महीने बीतने पर वही आलीशान इमारत देखने को मिलती है।

फ्लैट खड़े कर भोले भाले लोगों को बेचने का चल रह खेल
इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि सलारपुर हाजीपुर, भंगेल और सोरखा जैसे गांवों में एक के बाद एक नए फ्लैट खड़े हो रहे हैं। कई मामलों में पुराने मकानों को गिराकर बिना अनुमति के चार-पांच मंजिला इमारतें बना दी गई हैं, जिनमें बाद में आम लोगों को फ्लैट बेच दिए जाते हैं। प्राधिकरण ने ऐसे निर्माणों को अवैध बताते हुए चेतावनी दी है कि भविष्य में इन्हें कभी भी सील या ध्वस्त किया जा सकता है और खरीदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कार्रवाई अक्सर कागजों और नोटिसों तक सीमित
नोएडा प्राधिकरण का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी सूरत में नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई अक्सर कागजों और नोटिसों तक सीमित रह जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर अवैध निर्माण बेरोकटोक जारी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब संभल जैसे जिलों में सख्ती से अवैध निर्माण गिराए जा सकते हैं, तो नोएडा जैसे हाईटेक शहर में भूमाफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी।

सलारपुर, भंगेल, सोरखा, बसई और नगला वाजिदपुर जैसे गांवों में दर्जनों बुनियादी ढांचे और बहुमंजिला इमारतें प्राधिकरण की मंजूरी के बिना खड़ी की गईं, जिन पर ‘अवैध निर्माण’ लिखकर नोटिस लगाए गए हैं और कई डिवेलपर्स के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। अधिकारी लगातार मौके पर टीमों के साथ निरीक्षण कर रहे हैं और बिना नक्शा या अनुमति के बन रही इमारतों में निर्माण कार्य रोकने और उन्हें हटाने की कवायद जारी है। पिछले साल प्राधिकरण ने हजारों वर्ग मीटर अतिक्रमण मुक्त कराया और 2,745 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की भूमि को सुरक्षित किया है, साथ ही लगभग 25 से अधिक एफआईआर भी दर्ज की गईं ताकि भूमाफिया और अवैध डिवेलपमेंट पर लगाम लगाई जा सके।

39 भूमाफियाओं पर कार्रवाई
सलारपुर गांव में प्राधिकरण ने 39 भूमाफियाओं द्वारा 24 प्लॉटों पर 60 से अधिक अवैध भवनों पर कार्रवाई शुरू की है और पुलिस-सहायता प्राप्त टीमों ने रोजाना निरीक्षण करके नोटिस जारी किए हैं, बावजूद इसके कई परियोजनाओं में निर्माण जारी रहा है। नोएडा प्राधिकरण ने ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करने का निर्णय लिया है, जिसमें सभी अवैध निर्माणों के नक्शे, फोटो और स्थिति अपडेट रखे जाएंगे ताकि जनता को धोखे से प्लॉट या फ्लैट खरीदने से रोका जा सके और प्राधिकरण का निगरानी तंत्र मजबूत किया जा सके। हालाँकि यह कार्रवाई निरंतर जारी है, वास्तविक स्थिति यह है कि नोएडा में अवैध निर्माण बढ़ रहे हैं और हर-गांव में भूमि पर कब्जा तथा निर्माण के मामले सामने आ रहे हैं, जिस पर प्राधिकरण द्वारा नोटिस, एफआईआर, भूमि मुक्तिकरण, सीलिंग और भविष्य में बुलडोजर से गिराने जैसी सख्त कार्रवाई की जा रही है। जनता को चेतावनी दी जा चुकी है कि बिना मान्यता की संपत्ति में निवेश जोखिमभरा है क्योंकि प्रशासन आगे चलकर उन निर्माणों को भी गिरा सकता है जिन पर आवश्यक मंजूरी नहीं है। कुल मिलाकर कहा जाए तो नोएडा में संभल जैसे अफसर हो तो यहां भी अवैध निर्माण पर अंकुश लग सकता है।

 

यह भी पढ़ें : Trump Tariffs war: ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाया: भारत सहित कई देश प्रभावित, क्या चीन मुख्य निशाना?

यहां से शेयर करें