एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला: दिल्ली की एक विशेष एनआईए अदालत ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी नेता और दुख्तारान-ए-मिल्लत (डीईएम) की प्रमुख आसिया अंद्राबी को आतंकवाद से जुड़े मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई है। उनके दो सहयोगियों—सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन—को 30-30 वर्ष की सजा दी गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
आसिया अंद्राबी और उनके सहयोगियों पर अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज था। एनआईए ने आरोप लगाया था कि वे जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए साजिश रच रही थीं, अलगाववादी प्रचार कर रही थीं और पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों (जैसे लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद) से संपर्क बनाए हुए थीं।
जनवरी 2026 में अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश, राज्य के खिलाफ अपराध, साम्प्रदायिक उन्माद फैलाने और UAPA की धाराओं (सहित सदस्यता व प्रचार से संबंधित) के तहत दोषी ठहराया था। हालांकि, अदालत ने उन्हें भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने (IPC 121) और प्रत्यक्ष आतंकवादी हिंसा या फंडिंग के गंभीर आरोपों से बरी कर दिया था। दोषसिद्धि मुख्य रूप से उनके भाषणों, लेखों, सोशल मीडिया गतिविधियों और संगठनात्मक कामों पर आधारित थी।
सजा का विवरण
आसिया अंद्राबी (64 वर्ष): उम्रकैद (लाइफ इम्प्रिजनमेंट)। सोफी फहमीदा (40 वर्ष) और नाहिदा नसरीन (58 वर्ष): प्रत्येक को 30 वर्ष की जेल। एनआईए ने सजा के दौरान दलील दी थी कि कम सजा देने से कानून की विश्वसनीयता प्रभावित होगी और राज्य के खिलाफ साजिश करने वालों को कड़ी सजा का संदेश जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य, उम्र और लंबी जेल अवधि (लगभग 8 वर्ष) का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा या पहले से काटी गई अवधि को ही पर्याप्त मानने की अपील की थी।
अतिरिक्त जानकारी
यह मामला 2018 के आसपास शुरू हुआ था, जिसमें एनआईए ने वर्षों तक 53 गवाहों और 186 दस्तावेजों की जांच की। आसिया अंद्राबी को पहले भी कई बार गिरफ्तार किया जा चुका है और वे कश्मीर में महिलाओं के बीच अलगाववादी विचारधारा फैलाने के लिए जानी जाती हैं। उनके पति अशीक हुसैन फक्तू भी पहले से उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
अदालत का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कानूनों के सख्त इस्तेमाल का उदाहरण माना जा रहा है। इस पर अलग-अलग पक्षों से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं—कुछ इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, सजा आज 24 मार्च 2026 को दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह द्वारा सुनाई गई है।

