बैंक का सीईओ गिरफ्तार तो पुलिस अफसर पर मेहरबानी

0
3

ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट फर्जीवाड़े की परत दर परत खुलती जा रही है। इस पूरे गौरखधंधे को अंजाम देने वाले सलाखों के पीछे है लेकिन उन्हें शह देने वाले अब भी पुलिस गिरफ्त से दूर है। इस फर्जीवाड़े में नोबल कोऑपरेटिव बैंक के सीईओ विजय शर्मा की गिरफ्तारी हो चुकी है। मगर पुलिस की जांच अपने अधिकारियों पर मेहरबान है। मेरठ मंडल के एक तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी हमेशा बाइक बोट के मास्टर मांइड संजय भाटी के लिए जिले के अधिकारियों पर कार्रवाई न करने का दबाव बनाते थे। इन आला अधिकारी का तबादला मेरठ मंडल से हो चुका है लेकिन योगी सरकार किसी भी सूरत में इस तरह के अधिकारियों पर नरमता नहीं बरत रही। बावजूद इसके कुछ पुलिस कर्मियों के दबाव में जांच करने के चलते ये अधिकारी सरकार की पकड़ से दूर है।
बैंक के सीईओ तो गिरफ्त में आ चुके है लेकिन निवेशकों का इंतजार है कि सरंक्षण देने वाले पुलिस अधिकारी भी जेल जाने चाहिए।
बैंक और आरोपी के गठजोड़ से ही बाइक बोट फर्जीवाड़े की पटकथा लिखी गई थी। अगर बैंक अधिकारी फर्जीवाड़े की जमा की जा रही रकम के संबंध में सही पड़ताल कर लेते या फिर बैंक के जारी किए जा रहे चेक पर रोक लगा देते तो आरोपी इतना बड़ा फर्जीवाड़ा करने में कामयाब नहीं होते।
बाइक बोट फर्जीवाड़े का पहला केस दर्ज कराने वाले जयपुर के सुनील मीणा ने बताया कि ईडी ने जब उन्हें पूछताछ के लिए लखनऊ स्थित दफ्तर पर बुलाया था। उस दौरान ही उन्होंने ईडी के सामने बैंक की भूमिका व किसी बड़े अधिकारी के फर्जीवाड़े के आरोपियों से साठगांठ की आशंका जता दी थी। इसका समाचार भी उस दौरान अमर उजाला में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद से ही जांच एजेंसियां बैंक व फर्जीवाड़े में लिप्त बैंक अधिकारी की जांच में जुट गई थीं।
इधर, बाइक बोट फर्जीवाड़े के आरोपियों पर कार्रवाई और पीडि़तों का रुपया वापस दिलाने की मांग को लेकर 18 माह से कोट गांव स्थित मुख्य दफ्तर पर धरना दे रहे मुन्ना बालियान ने बताया कि बैंक के सीईओ की गिरफ्तारी से पीडि़त निवेशकों को राहत मिली है। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से ही आरोपी इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा करने में कामयाब हुए लेकिन पुलिस के आला अधिकारी ने इसका उद्घाटन किया था।