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जीएसटी: व्यापारियों की शंकाए दूर करना बेहद जरूरी

By: admin
30-03-2017 14:03:58 PM

नई दिल्ली। देश में एक बड़े बदलाव के तहत जीएसटी अब लगभग पास ही हो गया है। देश में एक जैसी कर व्यवस्था हो इसके लिए जरूरी है। यह भी आवश्यक है कि इसकी दर को शुरुआत में कम रखा जाए ताकि व्यापारियों पर इसका ज्यादा प्रभाव न पड़े। सबकुछ सिस्टम में आने के बाद धीरे-धीरे दर बढ़ाने से व्यापारियों और आमजन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। कड़वी दवाई है इसलिए हौले-हौले ही दिया जाना चाहिए। यहां भी निहायत जरूरी है कि व्यापारियों से जो सलाह मांगी गई हैं और उनकी जो शंकाए हैं जीएसटी को लागू करने से पहले उनका भी निपटारा किया जाए।
व्यापारियों की शंकाएं:-
1. जीएसटी लागु होने के बाद किसी भी स्टेट को अलग से कोई टैक्स लगाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। जैसा कि कुछ स्टेटों ने अभी से एंट्री टैक्स अलग से लगाने की आवाज उठा दी है।
2. जीएसटी की दर जो भी रखी जाए, उसमें पांच वर्ष से पहले संशोधन न हो, जैसा कि पिछले दो वर्षों में सर्विस टैक्स की दर 12 फीसदी से बढ़ाकर 15 जीएसटीतक कर दी गई है।
3. दर बढ़ाने का निर्णय पार्लियामेंट करे क्योंकि टैक्स की दर पुरे देश के लिए होगी। किसी अकेले मंत्री को अपनी मनमर्जी से टैक्स बढ़ाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
4. टैक्स अदायगी में देरी होने पर या हिसाब किताब में गड़बड़ी पाए जाने पर व्यापारियों को पांच वर्ष की सजा का प्रावधान रखा गया है, जो कि सरासर ग़लत है। इससे व्यापारी भाइयों पर बहुत भारी मुसीबत आने वाली है।
अफ़सर स्टॉक का पूरा हिसाब किताब मांगेगा। उदाहरण के तौर पर आपने पानी कितना पिया और यूरीन कितना किया। या तो अधिकारियों को खुश करो अन्यथा जेल जाओ।
इस देश में सारे कानून कायदे व्यापारियों पर ही क्यों लागु किए जाते है जबकि व्यापारी की देश के योगदान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। व्यापारी टैक्स जमा करता है, फिर उसका हिसाब रखता है और सरकार को टैक्स जमा करवाता है, फिर भी व्यापारी चोर कहलाता है।
सरकारी अधिकारियों को साठ वर्ष बाद व सांसदो, विधायकों को उनके निर्वत होने पर चाहे कोई भी ऊम्र हो, तुरन्त पैंशन मिलनी शुरू हो जाती है।
एक व्यापारी जो सारी जिंदगी लोगों को रोजगार व टैक्स देते देते बुढ़ा हो जाता है। उसके भविष्य व रिटायरमेंट के बारे सरकारें क्यों नहीं कानून बनाती। क्या व्यापारी सारी जिंदगी बंधुआ की तरह मुफ़्त में सरकार का टैक्स इकट्ठा करके जमा करवाता रहेगा?
हर व्यापारी को उसके द्वारा जमा कराए जीएसटी व इनकम टैक्स पर 10 फीसद के हिसाब से कमीशन मिलना चाहिए, जो कि उनके अकाउन्ट में डायरेक्ट जमा हो जाए और पीएम की भांति उस पर ब्याज मिलना चाहिए। यह अमाउंट इन्कम टैक्स से मुक्त हो, ताकि इस राशि का उपयोग वह अपने रिटायरमेंट के बाद या व्यापार कार्य छोडऩे के उपरान्त पैंशन के तौर पर इस्तेमाल कर सके। व्यापारी वर्ग न तो सरकार से आरक्षण मांग रहा है और न ही कोई सब्सिडी, लेकिन रिटायरमेंट के बाद सम्मान से जीने का अधिकार तो उसे भी मिलना चाहिए।


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