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विदेशी जानवरों की कमी से चिडिय़ाघर पड़ा सूना

By: admin
28-02-2017 15:48:05 PM

नए जानवर लाने में हो रही देरी, विभागों की कमी से एक्सचेंज प्रोग्राम प्रभावित शाहीन खान नई दिल्ली। दिल्ली का चिडिय़ाघर में रोजाना हजारों की संख्या में लोग देशी विदेशी पशु पक्षियों को करीब से देखने पहुंचते हैं। लेकिन यहां पहुंचकर ज्यादातर लोगों को निराशा हाथ लगती है। कारण कि यहां लगातार जानवरों की संख्या घट रही है। खासकर विदेशी जानवरों की। समय पर एक्सचेंज प्रोग्राम न होने के चलते आज चिडिय़ाघर के कई बाड़े सूने हो चुके हैं। जिराफ, जेबरा, अफ्रीकन गैंडा, कोबरा, शुतुरमुर्ग, चीता, कंगारू समेत कई ऐसे जानवर हैं जिनकी प्रजाति यहां से लुप्त हो चुकी है। साथ ही इन्हें लाने के लिए किसी तरह के प्रयास भी नहीं किए जा रहे हैं। यहां लगे कई साइन बोर्ड लोगों को भ्रमित भी कर रहे हैं जहां अब भी ऐसे जानवरों के नाम लिखे हैं जो अब यहां नहीं हैं। विदेशों से एक्सचेंज प्रोग्राम तो कई वर्ष पहले ही ठप हो चुका है। लेकिन हालत यह है कि चिडिय़ाघर को देश के भीतर से भी जानवर प्राप्त करने में मशक्कत करनी पड़ रही है। पिछले पांच वर्षो में यहां गिने चुने ही एक्सचेंज प्रोग्राम हुए हैं। जिनमें से भी लाए हुए ज्यादातर जानवर मर चुके हैं। इस समय चिडिय़ाघर में एक दर्जन से ज्यादा जानवर ऐसे हैं जो अकेले रह रहे हैं। इनमें से भी कई इतने बूढ़े हो चुके हैं कि मरने की कगार पर हैं और कई वषों से अकेले हैं। जिससे इनकी ब्रीडिंग प्रभावित हो रही है। इसमें भी गैंडे और बब्बर शेर की ब्रीडिंग सबसे अहम हैं जिसके लिए दिल्ली के चिडिय़ाघर को अहम जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन जोड़े की पूर्ति न होने के कारण ब्रीडिंग नहीं हो पा रही है। बाकी चिडिय़ाघरों से भी बात बनती नहीं दिख रही है जबकि कई जगह इनकी संख्या काफी ज्यादा है। हालांकि लंगूर और लिटिल मंकी लोगों का खासा मनोरंजन कर रहा है एकमात्र वह ही ऐसे जानवर हैं जिन्हे श्रे, हाथी और जेबरा के बाद लोग पसंद कर रहे हैं।


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