• Google

हाईवे घोटाले में उठे सवाल

By: admin
28-02-2017 15:26:23 PM

दिल्ली सहारनपुर-यमुनोत्री हाइवे को टू लेन से फोर लेन बनाने के नाम पर बैंक और जानकारों का कहना है कि जब भी कोई टेंडर होता है तो मोनिटरिंग कमेटी बनायी जाती है, जोकि कंपनी के काम-धाम पर नजर रखती है। यूपी स्टेट हाइवे अथॉरिटी के सीईओ नवनीत सहगल भी मानते हैं कि मोनिटरिंग कमेटी बनाई गई थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब कंपनी 13त्न काम कर बैठ गयी थी तो कमेटी ने क्या एक्शन लिया। इस बारे में कोई भी अधिकारी नहीं बता सका। विभाग के इंजीनियर्स ने मौके का इंस्पेक्शन कर क्या एक्शन लिया? यूपी स्टेट हाइवे अथॉरिटी के परियोजना महाप्रबंधक शिवकुमार अवधिया कहते हैं कि यह कंपनी और बैंक के बीच का मामला है। विभाग का काम नहीं हुआ इसलिए मामला दर्ज कराया गया है। लेकिन जानकार सवाल करते हैं कि जब काम बंद हो गया और हाइलेवल मीटिंग में भी इसका डिस्कशन हुआ था तो फिर मौके का निरीक्षण कर क्या एक्शन लिया गया। इसका जवाब अधिकारीयों को देना चाहिए। सवाल न.3प्त 6 महीने बाद क्यों रिपोर्ट लिखाई गयी? - परियोजना प्रबंधक शिवकुमार अवधिया कहते हैं कि कंपनी को टू लेन से 4 लेन बनाने के लिए 30 मार्च 2012 से 900 दिन का वक्त दिया गया था। जिसका 1 अप्रैल 2012 से काम भी शुरू हुआ। - लेकिन नवंबर 2013 में कंपनी ने काम रोक दिया। तब कंपनी ने बताया कि पर्यावरण विभाग की एनओसी नहीं मिल रही है। - तब कंपनी को 721 दिन का समय दिया गया, जोकि जून 2016 में पूरा हुआ और इस मामले की एफआईआर फरवरी में कराई गयी है। - जानकार कहते हैं कि समय पूरा होने के बावजूद जब काम पूरा नहीं हुआ था तब अधिकारियों ने क्या किया। - इस सवाल का जवाब भी अधिकारीयों के पास नहीं है। सवाल न.4प्त क्या विभाग से बैंक का पत्राचार नहीं हुआ? - जानकार सवाल ख?े कर रहे हैं कि क्या बैंक से विभाग का पत्राचार नहीं हुआ। - अधिकारीयों का कहना है कि सरकार के पैसों का नुकसान नहीं हुआ। - बहरहाल, अधिकारी इसका जवाब नहीं दे पाए कि बैंक से उनका पत्राचार हुआ था या नहीं। सवाल न.5प्त सवालों का जवाब देने से क्यों भाग रहे हैं अधिकारी? - जब इस मामले में अधिकारीयों से सवाल जवाब किया जाने लगा तो अधिकारी जवाब देने से कतराते रहे। - परियोजना महाप्रबंधक का कहना है कि उन्होंने अप्रैल 2015 में ज्वाइन किया है इसलिए पूरी जानकारी नहीं है। - जबकि जीएम एडमिन वीएस चौधरी का कहना है कि मामला टेक्नीकल से जु?ा है। इस वजह से मामला नहीं पता है। - अधिकारीयों का कहना है कि उस समय कौन सा स्टाफ था यह भी नहीं पता। - ऐसे में सवाल ख?े होते हैं कि जब विभाग का इससे लेना देना नहीं है।ाईवे घोटाले में उठे सवाल


Create Account



Log In Your Account