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भाई भतीजा वाद हुआ तो फिर डूबेगी कांग्रेस की नैया : आसिफ

By: admin
20-03-2017 14:53:51 PM

 

5 राज्यों में हुए चुनाव के बाद अब दिल्ली में एमसीडी चुनाव होने जा रहे है। यूपी में कांग्रेस का प्रदर्शन नामात्र रहा तो पंजाब, गोवा और मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उबर कर सामने आई। हालांकि कांग्रेस केवल पंजाब में ही सरकार बना पाई। इस सब पर कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद से जय हिन्द जनाब की संवाददाता शाहीन खान ने आगामी एमसीडी चुनाव और कांग्रेस के प्रदर्शन पर चर्चा की।
 

जिस तरह से यूपी में अपना अस्तिव खो दिया है क्या इसी तरह भी दिल्ली भी हार जाएगी कांग्रेस?

देखिए यह लोकल बॉडी के इलेक्शन है और इसमें पार्टी के साथ -साथ फेस वेल्यु  भी मायने रखती है। हर मतदाता चाहता है कि कॉर्पोरेशन का जो सदस्य हो, उससे सीधे तौर पर उसकी मुलाकात हो सके।  क्योंकि जिस तरह से एक गांव में प्रधान का कलेक्शन होता है उसी तरह से यह कॉर्पोरेशन का इलेक्शन है। आपको बता दूं कि पार्टी के साथ -साथ पार्टी की पॉलिसी, उसका मेनिफेस्टो और इसके साथ कैंडिडेट्स भी बहुत ज्यादा अहमियत रखते हैं।  अगर कॉरपोरेशन अच्छे कैंडिडेट्स अच्छे चेहरे उतारेगी तो हमें पूरा यकीन है कि कॉरपोरेशन में कांग्रेसे जीतकर आएगी। अभी इसके ऊपर काम चल रहा है पार्टी से हम उम्मीद करते हैं कि अच्छे से चेहरे कांग्रेस उतारे।  यदि कांग्रेस ने भाई भतीजावाद, तालुकात ,रिश्तेदारी चुनने का आधार रखा तो कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
 

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांगे्रस पार्टी चुनावी हारी है। क्या आपको लगता है कि नेतृत्व को बदलने की जरूरत है?

 ऐसा बिल्कुल नहीं है यह हालत है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांगेस चुनाव हारी है। बहुत सी चीज और से बहुत से फैक्टर होते हैं, कोई एक आदमी इसका जिम्मेदार नहीं होता। कोई एक नेतृत्व में जिम्मेदार नहीं होता । यूपी में इतना अच्छा नेतृत्व राज बब्बर जैसा चेहरा उतारा गया था वह फेल हो गए तो इसका मतलब यह नहीं है कि नेतृत्व में कहीं खोट है। हां कुछ हालात बनते हैं। हम लोग बुरी तरह से दिल्ली में हारे तो इसमें नेतृत्व की कहां कमी रही, कांग्रेस ने 15 साल इतना डेवलपमेंट किया शीला दीक्षित के नेतृत्व में क्या कमी थी, उनकी लीडरशिप में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं रही, फिर भी वह खुद चुनाव हारीं। चुनाव में बहुत से फैक्टर काम करते हैं इसमें नेतृत्व किसका है यह बात मायने नहीं रखती।
 

कांग्रेस से मुस्लिम मतदाता पूरी तरह से कट चुका है ?

नहीं है ऐसा नहीं है मुस्लिम मतदाता आज भी हम से जुड़े हैं
दिल्ली में आप को एक भी सीट नहीं आई, इससे साफ है कि मुस्लिम वोटर अब कांगेस से दूर हो चुका है?
ऐसा नहीं है इस बात से मुस्लिम वोटर कटने का मतलब नहीं होता।  कई बार इस तरह का माहौल बन जाता है जो दिल्ली चुनाव के दौरान बना।  अब मुस्लिमों ने यूपी में कांग्रेस समाजवादी पार्टी को वोट दिया उसके बावजूद भी हार गए। आज जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है मक्कारी, फरेब और संाम्प्रदायिकता का माहौल बनाया जा रहा है चुनाव में यह मुद्दे ज्यादा जिंदा हो जाते हैं विकास भी रखा रह जाता है। इसलिए अभी इसको नहीं कहा जाताा
 

आपको नहीं लगता कि कांग्रेस को अब नई पॉलिसी की जरूरत है?

कांग्रेस की कभी कोई गलत पॉलिसी नहीं रही है कांग्रेस बहुत सेक्युलर पार्टी है सबको साथ लेकर चलना चाहती है इसी चीज का आज कांग्रेस को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। आज जो है परिवारवाद धर्मवाद कितना चल गया है उसके आगे अब जो सबको साथ लेकर चलने वाली पॉलिसी है फिलहाल फेल हो रही है और इसका खामियाजा मुल्क भुगत रहा है।
 कुछ कमियां जरूर रहेंगी कांग्रेस में जो इलेक्शन हार गई लेकिन कांग्रेस ने हर जीत और हार को हमेशा संभाला है और आगे भी संभालेगी हर संभव प्रयास करेगी प्रयास करेगी की जनता का भरोसा वापस जीत सके


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