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नजरिया >> रण खत्म - कयास शुरू

By: admin
10-03-2017 13:38:23 PM

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की सातों चरण सकुशल संपन्न हो गए हैं। इस बार अच्छी बात यह रही कि सांप्रदायिक हिंसा की जो आशंकाएं चुनाव से पूर्व बनी हुई थी, चुनाव आयोग की सख्ती के चलते वे परवान नही चढ़ सकीं। सातों चरण बिना हिंसा के समाप्त हुए। इन चुनावों से यह साबित हो गया कि चुनाव आयोग चाहे तो राजनीतिक दलों पर काबू बनाए रख सकता है। चुनाव आयोग की सख्ती का ही नतीजा है कि हिंसा न करा पाने वाले दल मुद्दों से भटका कर जनता को दीगर बातों में उलझाते तो रहे परंतु महौल खराब नही कर सके। यानि देश के सबसे बड़े प्रदेश में चुनाव का महारण शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया।


इस चुनाव में राजनीतिक दल जनता को गुमराह करने के चक्कर में खुद भटके हुए दिखाई दिए। इसीलिए नेताओं से ज्यादा शमशान, कब्रिस्तान, ईद और दिवाली ज्यादा चर्चा में आ गए। इन सबसे भी आगे बढक़र गधों की भी काफी वैल्यू बढ़ गई। अभी तक जिसे सबसे ज्यादा मूर्ख समझा जाता था। उसी के दम पर लोग चुनाव में सफलता ढूंढने लगे।


बहरहाल, चुनाव खत्म होने के बाद अब परसों से मतगणना होनी है। हजारों उम्मीद वालों को पता नहीं तब तक नींद आएगी कि नहीं। इतना जरूर है कि अब कयासों का बाजार गरम हो गया है। हर पार्टी अपनी-अपनी जीत के आंकड़े जुटाने में लगी है। हमेशा बुद्धू बनने वाले यूपी के मतदाताओं ने इस बार उम्मीदवारों को चकरघिन्नी बनाकर रख दिया है। उन्होंने अंदर तो वोट किसी को डाला और बाहर आकर किसी को बताया। इससे उम्मीदवारों के साथ-साथ एक्जिट पोल्स के मैन्यूप्लेटर भी परेशान हैं। यही कारण है कि इस बार चमत्कारित नतीजों की उम्मीद की जा रही है।
......वेट फॉर मार्च 11

- मोहम्मद आजाद


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