भाइयो! कालाधन आएगा..

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भाइयों-बहनों विदेशों में जमा काला धन आएगा। प्रधानमंत्री के हर भाषण में यह वाक्य सुनने को मिलता था। सुनने वालों को लगता था कि प्रधानमंत्री विदेशों में जमा काला धन ले आएंगे। मगर, उनको अंदाजा नहीं था कि प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल शब्द विलोम साबित होंगे। जिस तरह से स्विस बैंकों में भारतीयों का धन बढ़ा है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत से धन गया है या आया है। लेकिन सरकार क्या कर रही है यह सवाल हर भारतीय के मन में है। लोग रोजगार के लिए भटक रहे हैं। विकास के नाम पर तरह-तरह की जुमलेबाजी की जा रही है। हर भाषण में वादे हजार हैं और काम केवल जीरो हैं। स्विस बैंकों में किन-किन लोगों का धन जमा है इस बारे में क्या सरकार पता नहीं लगा सकती।
बाबा रामदेव कहते थे कि कालाधन देश में वापस मंगवाना उनकी प्राथमिकता है मगर अब वे पतंजलि के बढ़ते कारोबार के आगे सबकुछ भूल चुके हैं। कालाधन का नाम आते ही बाबा रामदेव मानों ऐसे हो जाते हैं जैसे उनके सामने कोई भूत आ गया हो। भाजपा के बड़े-बड़े नेता कालाधन देश में मंगाकर गरीबों के खाते में 15-15 लाख रुपए जमा करवाने वाले थे। यह बात अलग है कि बाद में उन्होंने खुद इसे चुनावी जुमला करार दे दिया। फिलहाल गरीबों के खाते तो खुले हैं, लेकिन सब्सिडी और सरकार की ओर से दिए जाने वाला वजीफा उनके खाते में आने की बजाय बड़े-बड़े लोगों का काली कमाई (बिना कर चुकाया पैसा) स्विस बैंकों में जमा हो रहा है।
एक ताजा रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हो चुका है कि खासकर नोटबंदी के बाद से स्विस बैंक में भारतीयों का 50 फीसदी कालाधन बढ़ा है। फिर से चुनाव…..भाईयों कालाधन आएगा…!


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