आरडीएसओ के तरणताल में मौतों का सिलसिला जारी

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 100 रुपये देकर मिलती तैराकी की ट्रेनिंग

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से ये स्वीमिंग पूल बना है तब से यहा पर कोई कोच नहीं है। बाहरी व्यक्ति 100 रुपये प्रतिदिन देकर स्वीमिंग करने आते हैं। यहां करीब 30-35 लोग आते हैं। वर्ष 2006 में 13 वर्षीय एक बच्चे की डूबने से मौत हुई थी। इसके बाद भी दो लोगों की यहा जान जा चुकी है।

लखनऊ। रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) स्थित स्वीमिंग पूल की शुरुआत 1997 में हुई थी। यहा सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। आरडीएसओ द्वारा एक प्राइवेट व्यक्ति के जरिये पूल का संचालन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से ये स्वीमिंग पूल बना है तब से यहा पर कोई कोच नहीं है। बाहरी व्यक्ति 100 रुपये प्रतिदिन देकर स्वीमिंग करने आते हैं। यहां करीब 30-35 लोग आते हैं। वर्ष 2006 में 13 वर्षीय एक बच्चे की डूबने से मौत हुई थी। इसके बाद भी दो लोगों की यहा जान जा चुकी है।
वहीं, आरडीएसओ के इंस्पेक्टर ने बताया कि पुल की लंबाई करीब 35 फीट और चौड़ाई 18 फीट है। पुल का पहला भाग पाच फीट उसके बाद आठ फीट और पिछला हिस्सा 14 फीट गहरा है। घटना के समय यहा कोई लाइफ सेवर भी नहीं था। वहीं, पूल के मुख्य द्वार पर साफ लिखा है कि अनाधिकृत व्यक्तियों का प्रवेष निषेध है। तरण ताल (स्वीमिंग पूल) में प्रवेश केवल उन्हीं सदस्यों को मिलेगा, जिनके पास तैराकी पहचानपत्र उपलब्ध है। वहीं, पीयूष द्वारा प्रति दिन 100 रुपये देने के बाद भी मैनेजर एनके कोसला ने उसे कोई पहचानपत्र नहीं जारी किया था।
आरडीएसओ अधिशासी निदेशक प्रशासन एनके सिन्हा का कहना है कि आरडीएसओ के आसपास आम लोगों के लिए स्वीमिंग पूल नहीं है। इस कारण आरडीएसओ में बाहरी व्यक्तियों को भी स्वीमिंग की अनुमति दी जाती है। हालाकि इसका शुल्क रेलकर्मियों की अपेक्षा अधिक रहता है। रेलवे में खेलकूद गतिविधि का जिम्मा रेलवे अधिकारियों का होता है। स्वीमिंग पूल में एक मैनेजर की तैनाती है जो कि रेलकर्मी नहीं है। यहा के पूल में युवक की मौत की जांच पुलिस कर रही है। आरडीएसओ भी अपने स्तर से मामले की जाच करेगी।
दरअसल, आरडीएसओ के स्वीमिंग पूल में गुरुवार सुबह संदिग्ध हालात में डूबकर छात्र पीयूष गुप्ता उर्फ अंकित (22) की मौत हो गई। पूल के संवेदनहीन कर्मचारियों और मैनेजर ने छात्र के परिवारीजन को इसकी सूचना तक नहीं दी और रेलवे अस्पताल में शव छोड़कर भाग निकले। पीयूष मूल रूप से कानपुर के किदवईनगर में के ब्लाक का रहने वाला था, लेकिन राजधानी के पारा क्षेत्र में गणपति विहार निवासी अपने मौसा डीके गुप्ता के यहा रह रहा था। वह आइटीआइ करने के बाद एसएससी और सेना की तैयारी कर रहा था। पीयूष के मौसा डीके गुप्ता सेना की एमईएस (मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस) में कार्यरत हैं।
मौसा ने बताया कि पीयूष के पिता रूप नारायन गुप्ता एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। परिवार में पीयूष की मां रेखा और बहन अंकिता है। उधर, पुलिस ने पूल के मैनेजर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। उधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से छात्र की मौत की पुष्टि हुई है। चचेरे भाई पवन गुप्ता ने बताया कि भाई को स्वीमिंग सीखनी थी। वह तीन माह पूर्व उसे लेकर आरडीएसओ आया था। यहा मैनेजर एनके कोसला ने बताया कि बाहरी व्यक्तियों की तीन हजार रुपये प्रति माह स्वीमिंग की फीस है। आप चाहें तो प्रतिदिन 100 रुपये देकर भी तैराकी सीख सकते हैं। डीके गुप्ता ने बताया कि पीयूष नौ सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता था। इसी कारण वह स्वीमिंग सीखने के लिए आरडीएसओ आता था लेकिन यह ख्वाहिश लिए वह दुनिया से चला गया। इकलौते बेटे की मौत से बदहवास हुए माता-पिता:

इकलौते बेटे पीयूष की मौत से पिता रूप नारायन और मां रेखा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटे की मौत की खबर सुनते ही वह बदहवास हालात में कानपुर से लखनऊ पहुंचे। अस्पताल में पीयूष का शव देखकर रेखा अचेत हो गई। रिश्तेदारों ने किसी तरह उन्हें संभाला। आखिर कर्मचारियों ने क्यों नहीं दी सूचना:

पीयूष के चचेरे भाई पवन ने बताया कि किसी विवाद के बाद मैनेजर और पूल के कर्मचारियों ने भाई को डुबोकर मार दिया। इसके बाद उसे हादसे का रूप देने के लिए अस्पताल में शव छोड़कर भाग निकले। अगर उन्होंने भाई की हत्या नहीं की तो वह भागते क्यों। उनके पास रजिस्टर में घर वालों का मोबाइल नंबर भी दर्ज था। वह तत्काल इसकी सूचना परिवारीजनों को दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। सूचना पर पहुंचे आरपीएफ के इंस्पेक्टर ने भाई की स्कूटर की डिग्गी तोड़कर उससे आधार कार्ड और मोबाइल निकाला। इसके बाद उन्होंने फोन कर घटना की जानकारी दी। गिरफ्तारी को लेकर प्रदर्शन:

परिवारीजन ने पूल के मैनेजर और कर्मचारियों पर हत्या का आरोप लगाकर विरोध-प्रदर्शन किया और आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी की माग करने लगे। सूचना पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीडि़त आरोपितों के खिलाफ कार्यवाही का आश्वासन देकर उन्हें शात कराया। इसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।


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